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रूस की बढ़ती धमकियों के बीच यूरोप ने सशक्त किया अपना रक्षा तंत्र


Anoop singh

25 जून 2025

यूरोप में एक नया रक्षा युग आरंभ हो चुका है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के नेतृत्व में यूरोपीय देशों ने अब एकजुट होकर अपनी सुरक्षा प्रणाली को मज़बूत करने का निर्णय लिया है। रूस की आक्रामकता और विस्तारवादी रणनीतियों के बीच यह रुख यूरोपीय सुरक्षा नीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो रहा है।

हाल ही में सम्पन्न हुए नाटो (NATO) सम्मेलन में यूरोपीय देशों ने रक्षा क्षेत्र में निवेश को कई गुना बढ़ाने का सामूहिक निर्णय लिया। अब यह केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यावहारिक रणनीति है जो यह सुनिश्चित करेगी कि यूरोप अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी समर्थन पर पूरी तरह निर्भर न रहे।

फ्रांस की अग्रणी भूमिका

फ्रांस इस बदलाव में सबसे आगे खड़ा है। फ्रांसीसी सरकार पहले ही 60 अरब यूरो से अधिक के रक्षा बजट को स्वीकृति दे चुकी है। यह न केवल एक प्रतीकात्मक कदम है बल्कि रूस जैसी ताकतों के सामने यूरोप की तैयारियों और आत्मनिर्भरता का स्पष्ट संदेश भी है।

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि यूक्रेन को समर्थन देना अब केवल एक कूटनीतिक या नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यूरोपीय संप्रभुता और स्थिरता की रक्षा का केंद्रीय पहलू है। उन्होंने दोहराया कि “जब तक आवश्यक होगा, फ्रांस और यूरोप यूक्रेन के साथ खड़ा रहेगा।”

रणनीतिक बदलाव की दिशा में कदम

यूरोप का यह सामूहिक संकल्प एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है—अब महाद्वीप सामूहिक सुरक्षा में अधिक निवेश, बेहतर समन्वय और रणनीतिक स्वायत्तता की ओर अग्रसर है। इससे न केवल रूस को एक स्पष्ट चेतावनी जाती है, बल्कि यूरोप की लोकतांत्रिक संरचना और शांति को बनाए रखने का संकल्प भी मज़बूत होता है।

निष्कर्ष

रक्षा नीतियों में यह नया यूरोपीय दृष्टिकोण यह संकेत देता है कि महाद्वीप अब वैश्विक शक्तियों के भरोसे नहीं रहेगा। यूरोप अब तैयार है—अपनी सीमाओं की रक्षा करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखने और रूस जैसी चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए।


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