
वॉशिंगटन डी.सी., 26 जून 2025 – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नवीनतम रक्षा बजट प्रस्ताव के ज़रिए अमेरिकी सैन्य नीति में एक बड़ा मोड़ दर्शाया है। इस बजट में पारंपरिक सैन्य ढांचे के विस्तार की बजाय अत्याधुनिक तकनीकों और सैनिकों के कल्याण पर अधिक ज़ोर दिया गया है।
तकनीकी आधुनिकीकरण को प्राथमिकता
ट्रंप द्वारा प्रस्तुत बजट का प्रमुख फोकस उन्नत मिसाइल प्रणालियों, ड्रोन जैसे अनमैन्ड एरियल प्लेटफॉर्म और साइबर युद्ध क्षमताओं में निवेश है। यह दृष्टिकोण आने वाले वर्षों में संभावित तकनीकी युद्धों के लिए अमेरिकी सेना को तैयार करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
सैन्यकर्मियों के लिए वेतन वृद्धि
सैनिकों के मनोबल को बढ़ावा देने और भर्ती दरों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से इस बजट में सैन्यकर्मियों के वेतन में बढ़ोतरी का भी प्रावधान किया गया है। यह फैसला स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन सैनिकों के कल्याण को गंभीरता से ले रहा है।
पारंपरिक सैन्य ढांचे में कटौती
हालांकि यह तकनीकी उन्नयन कुछ परंपरागत क्षेत्रों की कीमत पर किया गया है। नौसेना के स्टाफ में कटौती और नए युद्धपोतों व फाइटर जेट की खरीद में कमी जैसे प्रस्ताव इस बात का संकेत हैं कि अमेरिका अब परंपरागत समुद्री व हवाई वर्चस्व की बजाय छोटे लेकिन अधिक घातक और स्मार्ट सैन्य ढांचे की ओर बढ़ रहा है।
कुल प्रस्तावित रक्षा बजट
इस बजट में कुल $892.6 बिलियन की राशि प्रस्तावित की गई है, जो मौजूदा वित्तीय वर्ष के समान स्तर पर है। इसका मतलब है कि सरकार ने बजट में बड़ा इजाफा न करते हुए भी प्राथमिकताओं को नए सिरे से निर्धारित किया है।
परमाणु क्षमताओं और आंतरिक सुरक्षा को बल
इस प्रस्ताव में ऊर्जा विभाग के तहत आने वाले परमाणु कार्यक्रमों के लिए फंडिंग तथा होमलैंड सिक्योरिटी के क्षेत्र में खर्च बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। इससे स्पष्ट होता है कि यह बजट केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्रित है।
F-35 कार्यक्रम पर बहस
बजट में एफ-35 फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए भी निवेश जारी रखने की योजना है, जिसे लेकर पहले ही कई सांसद इसकी लागत-लाभ पर सवाल उठा चुके हैं। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन इसे अगली पीढ़ी की रक्षा रणनीति के लिए जरूरी मानता है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का यह रक्षा बजट प्रस्ताव स्पष्ट रूप से यह संकेत देता है कि अमेरिका अब पारंपरिक सैन्य शक्ति की बजाय तकनीकी रूप से उन्नत, तेज और अधिक प्रतिक्रियाशील सैन्य बल की दिशा में बढ़ रहा है। यह बदलाव अमेरिका को आने वाले खतरों से निपटने में अधिक सक्षम बना सकता है, लेकिन इसके साथ कुछ विवाद और रणनीतिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।