HIT AND HOT NEWS

26 जून, 2025संयुक्त राष्ट्र चार्टर की 80वीं वर्षगांठ: वैश्विक सहयोग और शांति की स्थायी नींव


Anoop singh

न्यूयॉर्क, 26 जून 2025 – आज का दिन इतिहास के उन पन्नों को फिर से जीवंत करता है, जब द्वितीय विश्व युद्ध की राख से एक नए युग की नींव रखी गई थी। 26 जून 1945 को, विश्व के 50 देशों ने मिलकर एक ऐसे दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए जिसने मानवता के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त किया – इसे हम आज संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नाम से जानते हैं।

चार्टर केवल कागज़ का एक टुकड़ा नहीं था, बल्कि यह उन आदर्शों की प्रतिध्वनि थी जो वैश्विक सहयोग, शांति, मानवाधिकार और विकास के आधार स्तंभ बने। इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की नींव रखी और यह सुनिश्चित किया कि विश्व राष्ट्र एक साझा मंच पर आकर संघर्षों की जगह संवाद को चुनें।

80 वर्षों की यात्रा: चुनौतियाँ और उपलब्धियाँ
पिछले आठ दशकों में संयुक्त राष्ट्र ने अनेक संकटों का सामना किया – कोरियाई युद्ध, शीत युद्ध, अफ्रीका और एशिया में उपनिवेशवाद का अंत, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, और वैश्विक महामारी जैसी चुनौतियाँ। इन सबके बीच, संयुक्त राष्ट्र ने बार-बार यह साबित किया कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट रखने की शक्ति रखता है।

मानवाधिकारों की रक्षा हो, शांति मिशनों की शुरुआत, बच्चों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा, या फिर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को आगे बढ़ाना – हर पहलू में UN की भूमिका अहम रही है।

वर्तमान संदर्भ में चार्टर का महत्व
आज जब विश्व एक बार फिर अस्थिरता, युद्ध, जलवायु संकट और तकनीकी असमानताओं से जूझ रहा है, तब संयुक्त राष्ट्र चार्टर की मूल भावना और भी प्रासंगिक हो जाती है। यह हमें याद दिलाता है कि चाहे मतभेद कितने भी हों, संवाद और सहयोग ही स्थायी समाधान की कुंजी हैं।

महासचिव का संदेश
संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने वर्षगांठ के अवसर पर कहा, “यह चार्टर आज भी हमें प्रेरणा देता है – एक ऐसी दुनिया के निर्माण के लिए, जो न्यायपूर्ण, समावेशी और शांतिपूर्ण हो।” उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने राष्ट्रीय हितों से ऊपर उठकर वैश्विक भलाई के लिए मिलकर कार्य करें।

भविष्य की दिशा
80 वर्षों की इस यात्रा ने यह सिखाया है कि वैश्विक समस्याएं केवल वैश्विक समाधान से ही हल हो सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र को अब और अधिक सशक्त, प्रभावी और समावेशी बनाने की आवश्यकता है ताकि अगली पीढ़ियाँ भी इस संस्थान पर वैसा ही विश्वास रख सकें जैसा 1945 में विश्व नेताओं ने रखा था।


निष्कर्ष:
संयुक्त राष्ट्र चार्टर की 80वीं वर्षगांठ केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी का भी अवसर है। यह दिन हमें इस संकल्प की याद दिलाता है कि विश्व में स्थायी शांति, समानता और सहयोग की दिशा में हम सभी का साझा उत्तरदायित्व है।


Exit mobile version