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भारत में मई 2025 के दौरान यात्री वाहन बिक्री में 13.6% की गिरावट: आर्थिक अनिश्चितता और वैश्विक तनाव से उद्योग पर असर


Anoop singh

नई दिल्ली – भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को मई 2025 में एक बड़े झटके का सामना करना पड़ा, जब यात्री वाहनों की कुल बिक्री में 13.6% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट न केवल उपभोक्ताओं की कमजोर खरीद क्षमता का संकेत देती है, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक अस्थिरता का भी प्रभाव दर्शाती है।

📉 बिक्री के आंकड़े क्या कहते हैं?

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 में जहां कुल 3.34 लाख यात्री वाहन बिके थे, वहीं मई 2025 में यह आंकड़ा गिरकर लगभग 2.89 लाख पर आ गया। इस कमी ने वाहन निर्माताओं को चिंतित कर दिया है, क्योंकि त्योहारी सीजन से पहले आमतौर पर बाजार में बढ़त देखी जाती है।

🌍 वैश्विक तनाव का असर

रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों ने भारतीय वाहन उद्योग पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डाला है। इससे वाहन निर्माण की लागत तो बढ़ी ही है, साथ ही ग्राहकों तक समय पर डिलीवरी देना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

💰 कमजोर उपभोक्ता विश्वास

देश में बढ़ती महंगाई, रोजगार के अवसरों में कमी और उच्च ब्याज दरों ने उपभोक्ताओं के विश्वास को कमजोर किया है। मध्यम वर्ग अब वाहन खरीद को टाल रहा है, जबकि पहले यह वर्ग ऑटोमोबाइल बाजार का मुख्य ग्राहक हुआ करता था।

🚗 किस श्रेणी पर सबसे ज्यादा असर?

कॉम्पैक्ट कारें और हैचबैक सेगमेंट, जो आमतौर पर सबसे अधिक बिकने वाले माने जाते हैं, उनमें सर्वाधिक गिरावट देखी गई है। इसके उलट, SUV सेगमेंट में थोड़ी स्थिरता देखी गई, हालांकि वहां भी वृद्धि नहीं हो पाई।

🏭 वाहन कंपनियों की प्रतिक्रिया

मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन को थोड़ा घटाने का निर्णय लिया है ताकि डीलरशिप में अनसोल्ड यूनिट्स का स्टॉक न बढ़े। कई कंपनियों ने यह भी संकेत दिया है कि वे आगामी महीनों में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नए ऑफर्स और छूट योजनाएं ला सकती हैं।

🔍 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार जल्द ही उपभोक्ता खर्च को प्रोत्साहन देने वाली नीतियाँ लागू नहीं करती है, तो यह मंदी लंबे समय तक बनी रह सकती है। साथ ही, इलेक्ट्रिक वाहनों में ट्रांज़िशन की प्रक्रिया को भी धीमा बताया गया है, जो पहले इस क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद मानी जा रही थी।


निष्कर्ष:

मई 2025 में यात्री वाहनों की बिक्री में आई गिरावट केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के बदलते रुझानों और विश्व परिदृश्य के प्रभावों की एक स्पष्ट झलक है। ऑटो सेक्टर के लिए यह समय आत्ममंथन और रणनीतिक बदलावों का है।


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