
| 26 जून 2025
लखनऊ – उत्तर प्रदेश की सियासत उस समय गहरे संकट में आ गई जब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता श्री माता प्रसाद पांडेय और पूर्व मंत्री श्री लाल बिहारी यादव पर कुछ अज्ञात हमलावरों ने जानलेवा हमला करने का दुस्साहस किया। यह घटना न केवल प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को भी झकझोर देती है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेता एक स्थानीय सभा को संबोधित कर लौट रहे थे जब अचानक कुछ असामाजिक तत्वों ने उनकी गाड़ियों का रास्ता रोककर हमला कर दिया। हमलावरों ने पहले तो उनके काफिले को घेर लिया और फिर पत्थरबाज़ी तथा गाली-गलौज करते हुए माहौल को अराजक बना दिया। सौभाग्यवश, उनके साथ मौजूद सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाई और स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया, जिससे किसी प्रकार की गंभीर हानि नहीं हो सकी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज़
इस कृत्य की चारों ओर से निंदा हो रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस हमले को “लोकतंत्र का अपमान” बताते हुए सरकार से तत्काल दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे कानून व्यवस्था की विफलता करार दिया है।
कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर फिर से बहस छेड़ दी है। क्या राज्य में जनप्रतिनिधि भी सुरक्षित नहीं हैं? यह सवाल अब आम नागरिकों के मन में गूंजने लगा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने आश्वासन दिया है कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उन्हें गिरफ़्तार कर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
निष्कर्ष:
राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन हिंसा उसकी आत्मा को घायल करती है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल नेताओं को डराने की कोशिश हैं, बल्कि आम जनता में भी भय का माहौल पैदा करती हैं। ऐसे में यह अत्यंत आवश्यक है कि प्रशासन इस प्रकरण में निष्पक्ष, पारदर्शी और कड़ी कार्रवाई कर लोकतंत्र की गरिमा को पुनः स्थापित करे।