
26 जून, 2025 |
तेहरान – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान की संसद ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया, जिसके तहत अब देश अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ सहयोग को निलंबित करेगा। यह निर्णय अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरानी परमाणु ठिकानों पर हाल ही में किए गए हमलों की प्रतिक्रिया में लिया गया है।
संप्रभुता पर हमला: ईरानी सांसदों का रोष
विधेयक के समर्थन में बोलते हुए ईरानी सांसदों ने आरोप लगाया कि IAEA के साथ सहयोग करने से ईरान को केवल विदेशी हस्तक्षेप, जासूसी और सैन्य आक्रमण झेलने पड़ रहे हैं। उनका कहना है कि यह सहयोग ईरान की सुरक्षा के लिए लाभकारी नहीं, बल्कि हानिकारक साबित हुआ है।
IAEA निरीक्षण पर विराम का असर
IAEA, संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था, लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखती रही है। लेकिन अब सहयोग रुकने से पारदर्शिता और निगरानी की प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेष रूप से यूरोपीय संघ और अमेरिका इस घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं क्योंकि इससे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता और भी बढ़ सकती है।
ईरान का पक्ष: “हमारा कार्यक्रम शांतिपूर्ण है”
ईरान के अधिकारियों ने एक बार फिर दावा किया है कि उनका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण है और ऊर्जा उत्पादन व चिकित्सा अनुसंधान जैसे उद्देश्यों के लिए है। लेकिन निरीक्षण रोकने से विश्व बिरादरी के बीच यह आशंका बढ़ गई है कि कहीं तेहरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में तो नहीं बढ़ रहा।
राजनयिक प्रयासों को झटका
यह विधेयक उस समय पारित हुआ है जब कई देशों द्वारा ईरान के साथ परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के प्रयास जारी थे। लेकिन अब इस कदम से उन कूटनीतिक प्रयासों को करारा झटका लग सकता है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश ईरान पर फिर से कठोर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे चुके हैं।
निष्कर्ष
IAEA से सहयोग समाप्त करने का ईरानी निर्णय सिर्फ एक तकनीकी कदम नहीं, बल्कि एक सख्त राजनीतिक संदेश भी है। यह दर्शाता है कि ईरान अब अपने परमाणु अधिकारों को लेकर किसी तरह की बाहरी बाध्यता स्वीकार करने को तैयार नहीं है। आने वाले समय में यह फैसला पूरे क्षेत्र में और अधिक अस्थिरता ला सकता है।