
27 जून 2025
भारत सरकार ने जुलाई 2025 को “एंटी-मलेरिया माह” के रूप में घोषित किया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय रहते इलाज की अहमियत बताने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
क्यों है यह अभियान जरूरी?
मलेरिया अब भी भारत के कई हिस्सों में एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बना हुआ है। हालांकि सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों से मलेरिया के मामलों में काफी गिरावट आई है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर ग्रामीण और वर्षा-प्रभावित क्षेत्रों में यह बीमारी आज भी जानलेवा साबित हो रही है।
अभियान की प्रमुख बातें:
- लक्षणों की पहचान पर ज़ोर: बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, उल्टी, बदन दर्द और जी मिचलाना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने का आग्रह किया जा रहा है।
- सोशल मीडिया पर सक्रियता: मंत्रालय ने #AntiMalariaMonth हैशटैग के माध्यम से ट्विटर (अब X) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर जागरूकता फैलाने की पहल की है।
- संदेश साफ है: “लक्षणों को नजरअंदाज न करें – तुरंत जांच कराएं और पूरा इलाज लें।”
जनभागीदारी की आवश्यकता
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि मलेरिया से लड़ाई केवल सरकारी प्रयासों से नहीं जीती जा सकती, बल्कि इसके लिए आम जनता की भागीदारी भी अनिवार्य है। ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, आशा बहनों और पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि हर व्यक्ति तक सही जानकारी पहुंचे।
एक मलेरिया-मुक्त भारत की दिशा में कदम
भारत सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है — मलेरिया मुक्त भारत। इसके लिए शुरुआती जांच, समय पर इलाज, मच्छरों की रोकथाम, और साफ-सफाई जैसे बुनियादी उपायों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्ष:
“एंटी-मलेरिया माह 2025” सिर्फ एक स्वास्थ्य अभियान नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। यह हमें याद दिलाता है कि एक छोटी सी लापरवाही जानलेवा बन सकती है, लेकिन जागरूकता और समय पर कार्रवाई से हम इस बीमारी को जड़ से मिटा सकते हैं।
तो इस जुलाई, मलेरिया को हराने के लिए एकजुट हों – जागरूक रहें, सतर्क रहें, स्वस्थ रहें।