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गहराता वैश्विक मानवीय संकट: फंड की भारी कमी बनी चुनौती


Anoop singh

27 जून 2025

दुनियाभर में मानवीय संकट अब और गंभीर होता जा रहा है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी (UNOCHA) ने चेताया है कि लगातार घटती वित्तीय सहायता के कारण लाखों लोगों के लिए जरूरी राहत सेवाएं या तो बंद हो गई हैं या संकट में हैं। यह स्थिति सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों जिंदगियों का सवाल बन चुकी है।


भोजन, दवाइयां और मूलभूत सेवाएं खतरे में

आर्थिक संकट और युद्धों से प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही हालात नाजुक थे, लेकिन अब फंडिंग में आई भारी गिरावट ने उन्हें और बदतर बना दिया है।

खाद्य आपूर्ति में कटौती के कारण हजारों परिवारों को कम या कभी-कभी बिल्कुल भी भोजन नहीं मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर असर इतना गंभीर है कि कई क्षेत्रों में टीकाकरण, दवाइयों की आपूर्ति और आपात सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाएं ठप होने की कगार पर हैं। इससे ना सिर्फ वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।


जमीनी कार्यकर्ताओं के सामने कठिन चुनौतियां

राहत कार्यों में लगे स्वयंसेवकों और NGO कर्मचारियों के लिए यह समय बेहद कठिन है। सीमित संसाधनों के बीच उन्हें तय करना पड़ रहा है कि किसे बचाया जाए और किसे नहीं। यह नैतिक द्वंद्व किसी भी मानवीय समाज के लिए शर्मनाक स्थिति है।


समर्थन की वैश्विक पुकार

UNOCHA समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन दुनिया के समृद्ध देशों, निजी दाताओं और वैश्विक संस्थाओं से आग्रह कर रहे हैं कि वे तत्काल वित्तीय मदद बढ़ाएं।
अगर समय रहते यह सहायता नहीं मिली, तो आने वाले महीनों में

भुखमरी से मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है,

बीमारियों का फैलाव भयावह रूप ले सकता है,

और सामाजिक अस्थिरता नए स्तर पर पहुंच सकती है।


निष्कर्ष: यह सिर्फ राहत की नहीं, इंसानियत की परीक्षा है

यह संकट केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि वैश्विक संवेदनशीलता और सहानुभूति की परीक्षा भी है।
क्या दुनिया जरूरतमंदों के लिए खड़ी होगी?
या फिर हम मूकदर्शक बनकर एक मानवीय त्रासदी को और गहराता देखेंगे?


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