
27 जून, 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने एक सशक्त बयान जारी करते हुए दुनिया को याद दिलाया कि हाल ही में इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ध्यान खींचा है, लेकिन इसके चलते ग़ाज़ा में जारी गंभीर मानवीय संकट को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय कूटनीतिक घटनाक्रम वैश्विक मीडिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता बने हुए हैं।
गुटेरेस ने अपने बयान में इज़राइल और ईरान के बीच हुए ताज़ा संघर्षविराम को आशा की एक किरण बताया, लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह आशा ग़ाज़ा पट्टी में व्याप्त भीषण स्थिति तक भी पहुंचनी चाहिए। उन्होंने साफ़ शब्दों में “ग़ाज़ा में तत्काल युद्धविराम” की मांग करते हुए, सभी बंधकों की शीघ्र और बिना शर्त रिहाई पर बल दिया।
महासचिव ने यह भी कहा कि ग़ाज़ा में “पूर्ण, सुरक्षित और सतत मानवीय सहायता पहुंच” सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह चेतावनी दी कि सहायता के अभाव में वहां की नागरिक आबादी की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। बच्चों, महिलाओं और आम नागरिकों को लगातार हिंसा, भूख और चिकित्सा सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
गुटेरेस का यह संदेश अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक स्पष्ट चेतावनी है कि ग़ाज़ा के लोगों की पीड़ा को वैश्विक प्राथमिकताओं में पीछे नहीं धकेला जा सकता। क्षेत्रीय स्थिरता की कोशिशें आवश्यक हैं, लेकिन उनके साथ-साथ मानवीय मूल्यों की रक्षा और निर्दोष लोगों की जान बचाना भी उतना ही जरूरी है।
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि यह केवल राजनीतिक या कूटनीतिक समाधान की बात नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक जिम्मेदारी है — उन लोगों के लिए जिनकी आवाज़ें इस संघर्ष में दबा दी गई हैं। उनका आह्वान था कि दुनिया उन आवाज़ों को सुने, जिनके पास अपनी पीड़ा साझा करने का कोई मंच नहीं है।
इस बयान ने एक बार फिर ध्यान दिलाया है कि ग़ाज़ा संकट केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक मानवीय आपदा है, जिसे नजरअंदाज करना आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खतरनाक उदाहरण बन सकता है।