
28 जून 2025
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने हाल ही में दोहराया कि वैक्सीन की सुरक्षा वैश्विक स्वास्थ्य नीति की नींव है। यह बयान न केवल वैज्ञानिक प्रामाणिकता को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दुनिया की जनता के प्रति WHO की जिम्मेदारी कितनी गंभीर है।
बीते दशकों में टीकों ने खतरनाक बीमारियों को खत्म करने और औसत आयु बढ़ाने में अभूतपूर्व भूमिका निभाई है। चेचक, पोलियो, खसरा जैसी बीमारियाँ अब इतिहास का हिस्सा बन चुकी हैं—और यह संभव हो सका है केवल प्रभावशाली और सुरक्षित टीकाकरण कार्यक्रमों की बदौलत। परंतु टीकों की प्रभावशीलता तभी कारगर होती है जब जनता उन पर भरोसा करे।
आज के डिजिटल युग में जब गलत जानकारी तेजी से फैलती है, वैक्सीन को लेकर झिझक और संदेह बढ़ जाते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए WHO ने यह स्पष्ट किया है कि वह हर वैक्सीन की गहन वैज्ञानिक समीक्षा और परीक्षण के बाद ही उसे अनुमोदन देता है।
सुरक्षा और पारदर्शिता का दोहरा स्तंभ
WHO न केवल टीकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि वैक्सीन की मार्केट में आने के बाद भी उस पर नजर बनाए रखता है। यह “पोस्ट-मार्केट सर्विलांस” किसी भी संभावित साइड इफेक्ट या जोखिम की समय रहते पहचान में मदद करता है। साथ ही, संगठन पारदर्शिता पर जोर देता है—ताकि लोग सूचित और समझदारी भरे निर्णय ले सकें।
विश्वास से ही बनता है सामूहिक प्रतिरक्षा कवच
जब लोगों को भरोसेमंद, तथ्य-आधारित जानकारी मिलती है, तो वे टीकाकरण कार्यक्रमों में स्वेच्छा से भाग लेते हैं। इससे समाज में सामूहिक प्रतिरक्षा (herd immunity) विकसित होती है, जो कमजोर वर्गों की रक्षा करती है। यह सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा नहीं, बल्कि सामूहिक कल्याण की बात है।
आज के संदर्भ में वैश्विक आवश्यकता
आज जब दुनिया कई नई बीमारियों और संक्रमणों से जूझ रही है, तो वैक्सीन पर भरोसा और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना एक वैश्विक अनिवार्यता बन गया है। WHO का यह दृढ़ रुख दर्शाता है कि विज्ञान, सत्य और पारदर्शिता ही वह रास्ता है जिससे हम एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।