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चीन-ताइवान तनाव: बढ़ता सैन्य दबाव और क्षेत्रीय चिंता


Anoop singh

28 जून 2025

ताइपेई, ताइवान – ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि चीन लगातार अपनी सैन्य गतिविधियाँ ताइवान के आस-पास बढ़ा रहा है। शनिवार को ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के चार सैन्य विमान और छह नौसेना पोत ताइवान के पास देखे गए।

सबसे चिंता की बात यह रही कि इनमें से तीन विमान उस मिडियन लाइन को पार कर गए जो ताइवान जलडमरूमध्य में एक अनौपचारिक लेकिन महत्त्वपूर्ण सीमा मानी जाती है। यह सीमा परंपरागत रूप से चीन और ताइवान के बीच टकराव से बचाव का एक संवेदनशील बिंदु रही है।

ताइवान की वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में इन विमानों की घुसपैठ सुबह के समय दर्ज की गई, जिसके बाद ताइवान की सेना ने निगरानी और जवाबी कार्रवाई के लिए तत्काल कदम उठाए। यह घटना उस बड़े सैन्य अभ्यास के ठीक बाद हुई है जिसमें ताइवान ने एक दिन पहले 29 चीनी विमान और छह नौसेना पोतों की गतिविधि दर्ज की थी।

चीन की यह आक्रामक नीति उसके “वन चाइना पॉलिसी” के तहत आती है, जिसके अनुसार बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा मानता है और यदि आवश्यक हो तो बल प्रयोग से भी पुनः एकीकरण के लिए तैयार है।

हालांकि, ताइवान लंबे समय से स्वशासी रहा है और वहां 1949 से स्वतंत्र लोकतांत्रिक सरकार अस्तित्व में है। वर्तमान राष्ट्रपति लाइ छिंग-ते ने सेना को सतर्क रहने और निगरानी तंत्र को और मजबूत करने का निर्देश दिया है।

इन घटनाओं से न केवल पूर्वी एशिया में तनाव बढ़ रहा है, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। जब दुनिया पहले से ही पश्चिम एशिया और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, तब ताइवान संकट वैश्विक समुदाय के लिए एक और चिंता का विषय बनता जा रहा है।

ताइवान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने लोकतांत्रिक मूल्यों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, चाहे चीन का दबाव कितना भी क्यों न बढ़े। यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों के बीच का नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र बनाम अधिनायकवाद की वैश्विक बहस का प्रतीक बन चुका है।


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