
| दिनांक: 28 जून 2025
इंदौर, भारत – मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 29 वर्षीय महिला ने अपने पति और उसके मित्र पर वर्षों से हो रहे घरेलू उत्पीड़न, आर्थिक दबाव और यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ इंदौर महिला थाने में शिकायत दर्ज करवाई है, जिसमें उन्होंने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2016 में उसकी शादी पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों से राजस्थान के एक जिले में हुई थी। शुरूआत में विवाहिक जीवन सामान्य रहा, लेकिन कुछ ही वर्षों में पति की जुए की लत ने रिश्ते को बर्बादी की ओर धकेल दिया। पति पर करीब ₹8 लाख का कर्ज चढ़ गया, जिसे चुकाने के लिए उसने पत्नी के सारे गहने गिरवी रखवा दिए।
महिला का दावा है कि जब उसने रिश्तेदारों से पैसे उधार लेने से मना किया, तो उस पर मानसिक और शारीरिक रूप से अत्याचार किया गया। आए दिन उसे गालियाँ दी जाती थीं और मारपीट की जाती थी।
मामला तब और गंभीर हो गया जब उसके पति के बचपन के दोस्त अभिमन्यु, जो दिल्ली में रहता है, ने कथित रूप से सुझाव दिया कि महिला खुद उसके साथ यौन संबंध बनाकर यह कर्ज “समाधान” कर सकती है। महिला के इनकार के बाद न केवल उसे धमकियां दी गईं, बल्कि उसकी नाबालिग बेटी को भी नुकसान पहुँचाने की चेतावनी दी गई।
शिकायत के अनुसार, महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध पहले इंदौर और फिर 1 सितंबर 2023 को दिल्ली ले जाया गया। दिल्ली की फ्लाइट के टिकट कथित तौर पर अभिमन्यु द्वारा बुक किए गए थे। वहां एक होटल में उसे धमकी देकर यौन शोषण का शिकार बनाया गया।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। यह मामला सिर्फ एक पीड़िता की व्यथा नहीं, बल्कि उन अनगिनत महिलाओं की कहानी है जो घरेलू और आर्थिक शोषण की चुप्पी में जी रही हैं।
यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि किस प्रकार घरेलू हिंसा, वित्तीय निर्भरता और यौन अपराध एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पीड़िता का साहसिक कदम न केवल न्याय की मांग करता है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक चेतावनी भी है कि चुप्पी अब और नहीं चलेगी।
संभावित धाराएं:
- आईपीसी की धारा 498A (घरेलू हिंसा)
- धारा 376 (बलात्कार)
- धारा 506 (आपराधिक धमकी)
- धारा 34 (सामूहिक अपराध)
निष्कर्ष:
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पीड़ितों के लिए एक मजबूत कानूनी और सामाजिक सहारा प्रणाली की सख्त जरूरत है। महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और न्यायिक प्रणाली को मिलकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे मामलों में पीड़ित को त्वरित सहायता और न्याय मिल सके।