
पटना, 28 जून 2025 — भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision – SIR) की शुरुआत कर दी है। यह महत्त्वपूर्ण अभियान राज्य के प्रत्येक मतदाता की पहचान की पुष्टि कर मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करने हेतु चलाया जा रहा है। यह कार्यभार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के अंतर्गत आता है, जो 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के प्रत्येक सामान्य निवासी भारतीय नागरिक को मतदान का अधिकार प्रदान करता है।
बूथ स्तर पर मजबूत भागीदारी
इस अभियान में निर्वाचन आयोग ने मौजूदा 77,895 बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को सक्रिय किया है, जबकि नए बनाए गए मतदान केंद्रों के लिए अतिरिक्त 20,603 BLOs की नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। ये BLOs जमीनी स्तर पर जाकर प्रत्येक मतदाता की जानकारी का सत्यापन कर रहे हैं, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी पात्र नागरिक सूची से वंचित न रहे।
कमजोर वर्गों को प्राथमिकता
एक लाख से अधिक स्वयंसेवक भी इस अभियान में सम्मिलित हुए हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों, रोगियों, गरीबों और अन्य वंचित वर्गों की मदद कर रहे हैं। उनका मुख्य उद्देश्य इन समूहों को मतदाता सत्यापन और नामांकन फॉर्म भरने में सहायता प्रदान करना है।
राजनीतिक भागीदारी से पारदर्शिता में वृद्धि
राष्ट्रीय और राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों ने 1,54,977 बूथ स्तर एजेंट्स (BLAs) की नियुक्ति की है। यह राजनीतिक भागीदारी चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और समावेशी बनाने में सहायक सिद्ध हो रही है।
घर-घर जाकर वितरण और संकलन
बिहार की सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लगभग 7.89 करोड़ मतदाताओं के लिए नामांकन फॉर्म (Enumeration Forms) का घर-घर वितरण और संकलन कार्य प्रारंभ हो गया है। साथ ही, यह प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से भी पूरी तरह क्रियाशील है।
इन मतदाताओं में से लगभग 4.96 करोड़ वे हैं, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में था। उन्हें केवल अपने विवरण की पुष्टि कर फॉर्म को पुनः जमा करना है।
डिजिटल सूचना और निगरानी
मतदाताओं को जागरूक करने के लिए निर्वाचन आयोग 5.74 करोड़ से अधिक पंजीकृत मोबाइल उपयोगकर्ताओं को एसएमएस के माध्यम से सूचना भेज रहा है। जिला प्रशासन इस अभियान को समयबद्ध और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में पूरी तरह संलग्न है।
निष्कर्ष: बिहार में चल रहा यह विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान न केवल लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो। पारदर्शिता, तकनीकी सहयोग, और समाज के हर वर्ग की भागीदारी इस प्रक्रिया को प्रभावशाली बना रही है।
यह पहल आने वाले चुनावों में निष्पक्ष और समावेशी मतदान का मजबूत आधार तैयार करेगी।