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उत्तर प्रदेश बना पोषण का वैश्विक अग्रदूत, संयुक्त राष्ट्र ने की सराहनालखनऊ, जून 2025

Anoop singh

उत्तर प्रदेश ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। राज्य को संयुक्त राष्ट्र की विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की ओर से वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है, जिसने इसे कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में एक “आदर्श मॉडल” करार दिया है।

महत्वपूर्ण पहल – टेक होम राशन (THR) योजना
उत्तर प्रदेश की सफलता के केंद्र में “टेक होम राशन” (THR) योजना है, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं सहित 72 लाख से अधिक लाभार्थियों तक पहुँच बना रही है। इस योजना के माध्यम से घर-घर पोषण पूरक खाद्य सामग्री पहुँचाई जाती है, जिससे शिशु विकास और मातृ स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।

महिलाओं की अगुवाई में क्रांतिकारी बदलाव
इस पहल की खास बात यह है कि इसे ज़मीनी स्तर पर महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) द्वारा संचालित किया जा रहा है। इन समूहों ने न केवल राशन का उत्पादन और वितरण सुनिश्चित किया है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया है। सामाजिक रूप से सशक्त इन समूहों की भूमिका ने इस योजना को पारदर्शी और प्रभावी बनाया है।

आंकड़ों पर आधारित प्रबंधन और समावेशिता
राज्य सरकार ने पोषण कार्यक्रमों के संचालन में आधुनिक तकनीक और डेटा विश्लेषण का भी बेहतरीन उपयोग किया है। योजनाओं का मूल्यांकन, निगरानी और प्रभाव आकलन वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है, जिससे नीतियों की गुणवत्ता और उनकी पहुँच में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना
इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में “फूड एंड न्यूट्रिशन में इंटरनेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” की स्थापना की जा रही है। यह केंद्र न केवल भारत के पोषण लक्ष्यों को बल देगा, बल्कि पड़ोसी देशों को भी तकनीकी, अनुसंधान एवं नीतिगत सहायता प्रदान करेगा।

वैश्विक मान्यता – भारत की नई पहचान
संयुक्त राष्ट्र की सराहना के साथ, उत्तर प्रदेश अब विश्व मंच पर पोषण सुधारों के मॉडल के रूप में उभरा है। यह न केवल राज्य की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि पूरे भारत की प्रतिष्ठा को भी नई ऊंचाई पर ले जाती है।

निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की यह पहल एक उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति, महिला सशक्तिकरण, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिलकर समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन ला सकते हैं। यह कदम न केवल कुपोषण के खिलाफ युद्ध में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक स्वास्थ्य सुधार प्रयासों को भी दिशा देगा।


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