
नई दिल्ली, 28 जून 2025 — भारत के ऊर्जा क्षेत्र को डिजिटल युग में प्रवेश दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने ‘इंडिया एनर्जी स्टैक (IES)’ के विकास की घोषणा की है। यह एक व्यापक डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसका उद्देश्य देश की बिजली व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और एकीकृत बनाना है।
देश के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और नेट ज़ीरो उत्सर्जन की प्रतिबद्धता के तहत, यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जबकि अक्षय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और उपभोक्ता आधारित ऊर्जा बाजारों का विकास हो रहा है, वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म की बिखरी हुई स्थिति अब तक एक बड़ी बाधा बनी हुई थी।
क्या है इंडिया एनर्जी स्टैक?
‘इंडिया एनर्जी स्टैक’ ऊर्जा क्षेत्र की पूरी श्रृंखला — उत्पादन से लेकर खपत तक — को एक साझा, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल डिजिटल फ्रेमवर्क से जोड़ने का कार्य करेगा। इसके प्रमुख घटक होंगे:
- उपभोक्ताओं, उपकरणों और लेनदेन के लिए यूनिक डिजिटल आईडी
- रीयल-टाइम और सहमति-आधारित डेटा शेयरिंग
- खुले API के माध्यम से विभिन्न प्लेटफार्मों का समावेश
- नवाचार, उपभोक्ता भागीदारी और ऊर्जा बाजार को बढ़ावा देने वाले उपकरण
आधार और UPI जैसी सफलता की उम्मीद
ऊर्जा मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने इस पहल को आधार और यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांतियों की तर्ज पर बताया। उन्होंने कहा कि जैसे आधार ने पहचान प्रणाली को सरल बनाया और यूपीआई ने भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता लाई, वैसे ही IES बिजली सेवा क्षेत्र को पारदर्शी, विश्वसनीय और उपभोक्ता-केंद्रित बनाएगा।
पायलट परियोजना और भविष्य की योजना
IES के तहत 12 महीने का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा, जिसमें मुंबई, गुजरात और दिल्ली की उपयोगिताओं के साथ यूटिलिटी इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (UIP) का परीक्षण किया जाएगा। यह एक विश्लेषण-सक्षम डिजिटल एप्लिकेशन होगा, जो IES के ढांचे पर आधारित रहेगा।
इस परियोजना की निगरानी के लिए तकनीकी, औद्योगिक और नियामक विशेषज्ञों की एक टास्क फोर्स गठित की गई है। यह टास्क फोर्स न केवल डिज़ाइन और कार्यान्वयन पर निगरानी रखेगी, बल्कि एक श्वेत पत्र (White Paper) और राष्ट्रीय कार्यान्वयन रोडमैप भी तैयार करेगी।
निष्कर्ष
‘इंडिया एनर्जी स्टैक’ भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त और सतत ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने वाला महत्त्वपूर्ण कदम है। यह न केवल उपभोक्ताओं को सशक्त करेगा, बल्कि ऊर्जा उपयोग की पारदर्शिता, कुशलता और नवाचार में भी क्रांतिकारी परिवर्तन लाएगा।