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ऑपरेशन उमंग 5: राजस्थान पुलिस की बाल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल


Anoop singh

जयपुर, 29 जून 2025 – राजस्थान पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब बात बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की होती है, तो वह सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती, बल्कि समाज की अंतरात्मा बनकर सामने आती है। “ऑपरेशन उमंग 5” के अंतर्गत राज्यभर में एक सशक्त और संवेदनशील बाल संरक्षण अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को शोषण, उपेक्षा और खतरे से मुक्त कर एक सुरक्षित बचपन प्रदान करना है।

अभियान का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

ऑपरेशन उमंग का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की पहचान और पुनर्वास करना है जो किसी न किसी रूप में संकट में हैं – चाहे वह सड़क पर भटकते हुए हों, बाल मजदूरी में फंसे हों, घरेलू हिंसा या यौन शोषण के शिकार हों, या फिर शिक्षा से वंचित हों। इस अभियान में पुलिस न केवल उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही है, बल्कि उन्हें मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक सहयोग भी दिलवा रही है।

समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा

राजस्थान पुलिस ने इस अभियान को सिर्फ एक सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि जनभागीदारी का आंदोलन बनाने की दिशा में कदम उठाया है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में पुलिस ने लोगों से अपील की है –
“अगर आप किसी बच्चे को संकट में देखें, तो चुप न रहें। आवाज़ उठाएं, क्योंकि एक किरण भी अंधकार को दूर करने के लिए काफी होती है।”

सकारात्मक संदेश और सोशल मीडिया पर प्रभाव

अभियान को सोशल मीडिया पर #ChildProtection, #SayNoToChildAbuse और #SafeChildhood जैसे हैशटैग्स के माध्यम से समर्थन मिल रहा है। ये हैशटैग्स न केवल अभियान को डिजिटल पहचान दे रहे हैं, बल्कि आम जनता को संवेदनशील और जागरूक बना रहे हैं।

पुलिस की संवेदनशीलता और संवेदनशील पहल

ऑपरेशन उमंग सिर्फ कानून का पालन कराने का नाम नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। पुलिस बल के जवान बच्चों की मदद करते समय पूरी करुणा और सहानुभूति के साथ पेश आते हैं। वे केवल उन्हें बचाते नहीं, बल्कि उन्हें एक नई जिंदगी की ओर प्रेरित करते हैं।

निष्कर्ष: समाज की सामूहिक जिम्मेदारी

बच्चों की सुरक्षा किसी एक संस्था की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऑपरेशन उमंग हमें यह सिखाता है कि अगर हर नागरिक थोड़ा सा भी सजग हो जाए, तो हम हर बच्चे को एक सुरक्षित, खुशहाल और गरिमापूर्ण जीवन दे सकते हैं।

राजस्थान पुलिस का यह प्रयास न केवल अनुकरणीय है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा है।


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