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🌹 अपनेपन का एहसास : एक अनमोल रिश्ता 🌹

Anoop singh

हमारा जीवन रिश्तों की डोर से बंधा होता है। परिवार, मित्र, जीवनसाथी या संतान—ये सभी हमारे “अपने” होते हैं। लेकिन केवल खून का रिश्ता या साथ रहना ही अपनेपन का संकेत नहीं होता। असली अपनापन तब झलकता है जब हम किसी को दिल से यह एहसास कराते हैं कि “तुम हमारे लिए खास हो, महत्वपूर्ण हो।”

आज के तेज़ रफ्तार जीवन में लोग अक्सर रिश्तों की कद्र करना भूल जाते हैं। मोबाइल की स्क्रीन पर व्यस्त रहकर, हम सामने बैठे अपने प्रियजनों को नजरअंदाज़ कर देते हैं। हम मान लेते हैं कि हमारे “अपने” तो हमेशा हमारे ही रहेंगे, चाहे हम उन्हें समय दें या नहीं, प्रेम जताएं या नहीं। परंतु यह सोच भ्रम है।

अपनों को जताना ज़रूरी है

रिश्तों को सिर्फ महसूस नहीं, बल्कि जाहिर करना भी जरूरी होता है। जैसे एक पौधे को जीवित रहने के लिए पानी की आवश्यकता होती है, वैसे ही रिश्तों को जीवित रखने के लिए प्यार, समय और अपनत्व की ज़रूरत होती है। एक मुस्कान, एक स्पर्श, एक हालचाल पूछना, छोटी-छोटी बातें भी गहरे रिश्तों को मज़बूत बना सकती हैं।

वक़्त सिखा देता है जीना

अगर आपने अपनों को यह एहसास नहीं कराया कि आप उन्हें कितना चाहते हैं, तो वक्त धीरे-धीरे उन्हें आपकी गैरमौजूदगी का आदी बना देता है। वे बिना शिकायत किए, बिना कुछ कहे, जीना सीख लेते हैं। और जब एक बार कोई आपके बिना जीना सीख जाए, तो फिर रिश्ता केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है।

अपनों को खोने से पहले जागिए

हम अक्सर सोचते हैं कि समय आने पर सब ठीक कर लेंगे। लेकिन कई बार समय हमारे इंतजार में नहीं ठहरता। इसलिए जो भी अपने हैं—माता-पिता, जीवनसाथी, भाई-बहन, मित्र—उन्हें यह कहने में देर मत कीजिए कि “आप हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।” एक फोन कॉल, एक मैसेज, एक साथ बैठकर चाय पीना—ये सब चीज़ें किसी के दिल में आपके लिए एक खास जगह बना सकती हैं।

निष्कर्ष :

अपनेपन का एहसास एक अनमोल तोहफा है, जो न पैसों से खरीदा जा सकता है और न ही किसी दिखावे से बनाया जा सकता है। इसे केवल दिल से निभाया और महसूस किया जा सकता है। इसलिए अपने अपनों को समय दीजिए, भावनाएं साझा कीजिए और यह महसूस कराइए कि आप उनके लिए हैं—आज, कल और हमेशा।

🌞 “सुप्रभात! आपका दिन मंगलमय हो!” 🙏🌷


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