
वाशिंगटन डी.सी., 29 जून 2025 — अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने वैश्विक आर्थिक पुनरुद्धार में बढ़ती असमानता को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। आईएमएफ ने विशेष रूप से कमजोर और निम्न आय वाले देशों की बिगड़ती स्थिति पर ध्यान दिलाया है और वैश्विक समुदाय से इन राष्ट्रों के लिए केंद्रित और सशक्त सहायता की अपील की है।
आईएमएफ की हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि भू-राजनीतिक तनावों से लेकर जलवायु परिवर्तन तक, हाल की वैश्विक घटनाओं का सबसे अधिक दुष्प्रभाव गरीब देशों पर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है, “निम्न आय वाले और अस्थिर देश वैश्विक झटकों का सबसे बड़ा भार उठा रहे हैं।” यह असमानता इस बात की पुष्टि करती है कि कोविड-19 जैसी आपदाओं के बाद की पुनरुद्धार योजनाएं भी समान रूप से प्रभावी नहीं रही हैं।
आईएमएफ द्वारा जारी वास्तविक जीडीपी वृद्धि का आंकड़ा (2022–2024) यह दिखाता है कि जहां कुछ देशों में धीमी लेकिन स्थिर आर्थिक वृद्धि हो रही है, वहीं सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाएं या तो ठहराव में हैं या सिकुड़ रही हैं। सबसे अधिक अंतर उन देशों में देखा गया है जो “थोड़े अधिक विकसित” निम्न आय वाले देशों और उन देशों के बीच हैं जो अत्यधिक गरीबी और संस्थागत कमजोरी से जूझ रहे हैं।
समाधान: रियायती वित्त और निजी निवेश
आईएमएफ ने सुझाव दिया है कि इन देशों को दी जाने वाली वित्तीय सहायता को बढ़ाया जाए और यह सहायता अनुदान और रियायती ऋण के रूप में होनी चाहिए, जिससे उनके दीर्घकालिक कर्ज बोझ को कम किया जा सके। कमजोर राज्यों के पास आर्थिक झटकों को सहने की वित्तीय क्षमता बेहद सीमित है, ऐसे में यह सहायता उनके लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है।
इसके साथ ही, आईएमएफ ने अपेक्षाकृत स्थिर निम्न आय वाले देशों में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का भी आग्रह किया है। निजी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करके ये देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकते हैं और दीर्घकालिक विकास की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
वैश्विक सहयोग की जरूरत
आईएमएफ का मानना है कि अगर वैश्विक समुदाय ने इन असमानताओं को दूर करने के लिए ठोस और समावेशी नीतियां नहीं अपनाईं, तो यह असमानताएं और गहरी होती जाएंगी। संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक देश की विशेष परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय समाधान तैयार किए जाएं ताकि कोई भी राष्ट्र वैश्विक विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए।
जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था संतुलन की ओर बढ़ रही है, आईएमएफ की यह चेतावनी एक गंभीर संकेत है कि केवल कुल आर्थिक वृद्धि ही पर्याप्त नहीं है — वास्तविक समृद्धि प्राप्त करने के लिए न्यायसंगत, रणनीतिक और लक्षित समर्थन अनिवार्य है।