
न्यूयॉर्क, 1 जुलाई 2025 — भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार (स्थानीय समयानुसार) संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी “आतंकवाद की मानवीय कीमत” का उद्घाटन किया। इस आयोजन का उद्देश्य वैश्विक समुदाय को आतंकवाद से उपजे दर्द, पीड़ा और नुकसान के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में डॉ. जयशंकर ने आतंकवाद के विरुद्ध साझा वैश्विक प्रयासों को तेज करने और उन मूल्यों एवं मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध होने की आवश्यकता पर बल दिया, जिन्हें आतंकवाद नष्ट करना चाहता है।
यह प्रदर्शनी संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित की गई थी। अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने कहा, “यह एक गंभीर और भावनात्मक क्षण है, जब हम उन आवाजों को मंच दे रहे हैं जो अब हमारे बीच नहीं हैं, और उन परिवारों के साथ एकजुटता व्यक्त कर रहे हैं जिन्होंने आतंकवाद की विभीषिका को सहा है। यह आयोजन एक श्रद्धांजलि है उन निर्दोष लोगों के लिए जिन्हें हमसे छीन लिया गया, और उन यादों के लिए जो इस हिंसा से बिखर गईं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदर्शनी केवल चित्रों और गवाहियों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी साझा मानवता का प्रतीक है। “यह साहस की एक गैलरी है,” उन्होंने कहा। “हर स्मृति, हर कलाकृति, हर शब्द एक ऐसे जीवन की कहानी कहता है जो बाधित हुआ, बदला या खत्म हो गया। यह आम पुरुषों और महिलाओं की कहानियाँ हैं जो दुनिया के कोने-कोने से आती हैं।”
डॉ. जयशंकर ने यह भी कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों की पीड़ा हमें यह याद दिलाती है कि आतंकवाद के हर रूप और उसकी हर अभिव्यक्ति से लड़ना हमारा सामूहिक दायित्व है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि यह केवल स्मरण का स्थान नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक ऐसा मंच बनना चाहिए जहां से हम “नवीन प्रयासों के साथ आगे बढ़ें, मूल्यों की रक्षा करें, और उन अधिकारों को सुरक्षित करें जिन्हें आतंकवाद मिटाना चाहता है।”
प्रदर्शनी में ऐसी कई तस्वीरें, कहानियाँ और व्यक्तिगत अनुभव शामिल किए गए हैं जो यह दर्शाते हैं कि आतंकवाद न केवल जान लेता है, बल्कि परिवारों और समाज की आत्मा को भी गहरे तक चोट पहुंचाता है।
यह आयोजन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे भारत विश्व मंच पर आतंकवाद के विरुद्ध एकजुटता और सशक्त विरोध की आवाज बनकर उभर रहा है।
– समाप्त