
गुवाहाटी, 1 जुलाई 2025 —
असम ने खरीफ विपणन सत्र 2024-25 में अपने कृषि क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए अब तक की सबसे बड़ी धान खरीद को अंजाम दिया है। इस सत्र में राज्य सरकार ने करीब 7 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद करके न केवल किसानों का भरोसा जीता, बल्कि राज्य को कृषि आत्मनिर्भरता की राह पर और आगे बढ़ाया।
यह आंकड़ा न सिर्फ रिकॉर्ड है, बल्कि यह राज्य के किसानों के लिए नए विश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर उभरा है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार की दूरदर्शी नीति, तकनीकी नवाचार और किसानों से सीधे संवाद का बड़ा योगदान माना जा रहा है।
🔹 मुख्यमंत्री का वक्तव्य
राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने इस उपलब्धि को “असम के किसानों की मेहनत और सरकार की ईमानदार नीतियों का संपूर्ण परिणाम” बताया।
“यह सिर्फ धान का आंकड़ा नहीं, बल्कि हर उस किसान की मेहनत का सम्मान है, जिसने खेतों में दिन-रात एक करके यह लक्ष्य संभव बनाया,” – डॉ. सरमा
✅ धान खरीद की खास बातें
इतिहास में पहली बार 7 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की सरकारी खरीद।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर पारदर्शी तरीके से भुगतान सुनिश्चित किया गया।
1.5 लाख से अधिक किसानों को सीधे लाभ पहुंचा।
ऑनलाइन पोर्टल्स, रीयल टाइम भुगतान और स्थानीय खरीद केंद्रों की भूमिका अहम रही।
🌾 नीतिगत सुधार और डिजिटल बदलाव
इस सत्र में सरकार ने ई-खरीद प्रणाली, गांव स्तर पर सक्रिय खरीद केंद्र, और सीधे किसानों के खातों में भुगतान जैसी कई महत्वपूर्ण पहल कीं। इससे न केवल प्रक्रिया तेज़ हुई, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी समाप्त हो गई।
👨🌾 किसानों की प्रतिक्रिया
नलबाड़ी जिले के किसान प्रमोद कलिता ने कहा:
“पहली बार हमें धान का पूरा दाम समय पर मिला। पहले जहां हफ्तों इंतजार करना पड़ता था, अब पैसे सीधे खाते में आ रहे हैं। सरकार की यह पहल ऐतिहासिक है।”
📈 कृषि क्षेत्र की दिशा में बड़ा मोड़
असम की यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक और खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक दृढ़ कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार और नीति बनी रही तो असम निकट भविष्य में पूर्वोत्तर भारत में कृषि नेतृत्वकर्ता बन सकता है।
निष्कर्ष:
असम में इस बार की धान खरीद ना सिर्फ ऐतिहासिक रही, बल्कि यह राज्य के किसानों के लिए नई उम्मीद और सशक्त भविष्य का संकेत भी है। जब नीति, तकनीक और मेहनत एक साथ आती है, तो इतिहास खुद बनता है – और असम ने यह कर दिखाया।