
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया विदेश यात्रा, जिसमें उन्होंने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया का दौरा किया, भारत की वैश्विक रणनीति को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक पहलू बन गया है। यह दौरा केवल राजनयिक शिष्टाचार का प्रतीक नहीं, बल्कि विश्व पटल पर भारत के नेतृत्व को प्रगाढ़ करने की ठोस रणनीति है।
🎯 प्रमुख उद्देश्य
- वैश्विक दक्षिण से सशक्त सहयोग
भारत का लक्ष्य अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते क्षेत्रों के साथ द्विपक्षीय भागीदारी को प्रगाढ़ करना है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, तकनीक और डिजिटल परिवर्तन के क्षेत्रों में सहयोग प्राथमिकता पर है। - ऊर्जा और खनिज संसाधनों में साझेदारी
अर्जेंटीना और ब्राजील जैसे खनिज-संपन्न देशों से लिथियम, कच्चा तेल और जैविक ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। - प्रवासी भारतीयों के साथ आत्मिक जुड़ाव
त्रिनिदाद और टोबैगो तथा घाना जैसे देशों में बसे भारतीय मूल के नागरिकों के साथ संवाद, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भावनात्मक जुड़ाव भारत की ‘लोकदूत नीति’ का हिस्सा है।
📊 देशवार रणनीतिक सहयोग सारणी
देश सहयोग का मुख्य क्षेत्र घाना डिजिटल समावेशन, कौशल विकास, स्मार्ट कृषि त्रिनिदाद प्रवासी संवाद, सांस्कृतिक पुनर्जागरण अर्जेंटीना लिथियम साझेदारी, विज्ञान एवं अनुसंधान सहयोग ब्राजील BRICS सहयोग, जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त कार्य नामीबिया ग्रीन हाइड्रोजन, इको-टूरिज़्म विकास
🌏 ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की आधुनिक व्याख्या
यह यात्रा दर्शाती है कि भारत की विदेश नीति अब परंपरागत भू-राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़कर मानवता और समान विकास पर केंद्रित हो चुकी है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ अब केवल नारा नहीं, बल्कि कार्यनीति का हिस्सा बन चुका है।
✅ निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का जीवंत उदाहरण है। यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार नहीं, बल्कि भारत की भूमिका को एक वैश्विक समाधानकर्ता और विश्वसनीय भागीदार के रूप में प्रतिष्ठित करता है। भारत ने फिर यह प्रमाणित किया है कि वह न केवल एशियाई शक्ति है, बल्कि समस्त वैश्विक दक्षिण का विश्वसनीय नेता भी है।