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भारत की ऊर्जा क्रांति: नीति, सुशासन और जनकल्याण का समरस संगम


Anoop singh

नई दिल्ली, 2 जुलाई 2025 — भारत आज ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का नेतृत्व कर रहा है, जिसकी जड़ें मजबूत नीतियों, वित्तीय अनुशासन और जनहित की सोच में गहराई से समाई हुई हैं। भारतीय चार्टर्ड एकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के स्थापना दिवस पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने प्रेरक भाषण में इस परिवर्तनशील यात्रा को विस्तार से प्रस्तुत किया।

ऊर्जा: आर्थिक प्रगति की रीढ़

श्री पुरी ने ऊर्जा क्षेत्र को भारत की आर्थिक उन्नति की रीढ़ बताया। उन्होंने यह रेखांकित किया कि पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी कनेक्शनों में हुआ भारी इजाफा केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में जीवन की गुणवत्ता में आई वास्तविक बदलाव का प्रतीक है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी पहल ने न केवल महिलाओं को रसोई के धुएँ से मुक्ति दी, बल्कि उन्हें सम्मान और स्वास्थ्य की दिशा में सशक्त भी किया।

तेल और गैस क्षेत्र में सुधार: आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर

भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक बनने की दिशा में भी तेजी से बढ़ रहा है। सरकार द्वारा लाए गए व्यापक सुधारों ने सार्वजनिक और निजी निवेश को आकर्षित किया है, जिससे पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एलएनजी आयात टर्मिनलों का निर्माण, राष्ट्रीय गैस पाइपलाइन ग्रिड का विस्तार और जैव ईंधन परियोजनाओं में निवेश इस बदलाव के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।

वैश्विक अस्थिरताओं में भी अडिग नीति

कोविड-19 महामारी, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भूराजनीतिक तनाव जैसे अभूतपूर्व संकटों के बावजूद भारत की ऊर्जा नीति ने लचीलापन और दूरदृष्टि का परिचय दिया है। श्री पुरी ने बताया कि केंद्रित, जन-हितैषी और रणनीतिक निर्णयों के कारण भारत ने इन झटकों को सहते हुए मजबूती से वापसी की है।

वित्तीय अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संतुलन

अपने भाषण में मंत्री ने ICAI के योगदान की सराहना की और कहा कि लेखा समुदाय वित्तीय पारदर्शिता और नीति क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक यात्रा केवल आंकड़ों की नहीं, बल्कि समावेशी विकास और सामाजिक प्रतिबद्धता की यात्रा है, जिसमें नीति और कल्याण का सुंदर समन्वय है।

निष्कर्ष: भारत का नया विकास मॉडल

ICAI के स्थापना दिवस पर दिया गया यह भाषण केवल ऊर्जा और आर्थिक नीतियों की समीक्षा नहीं था, बल्कि यह भारत के उभरते विकास मॉडल की घोषणा भी था — एक ऐसा मॉडल जो भागीदारी, दूरदृष्टि और स्थायित्व पर आधारित है। भारत आज सिर्फ प्रगति नहीं कर रहा, बल्कि प्रगति को नए अर्थ दे रहा है — जहां विकास में हर नागरिक की भागीदारी है, और नीति में जनकल्याण की आत्मा।


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