
2 जुलाई 2025 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारत में “मेड इन चाइना” उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इस विषय को देश की कृषि व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताया और किसानों की मुश्किलों को सामने लाते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, “भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। लेकिन आज यह रीढ़ विदेशी निर्भरता के बोझ तले दब रही है। चीन से आने वाले उर्वरकों की आपूर्ति रुकने से खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।”
कृषकों की दिक्कतें और सरकार की लापरवाही
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि देश के किसान पहले से ही यूरिया और डीएपी जैसी आवश्यक उर्वरकों की कमी से जूझ रहे हैं। अब स्पेशलिटी फर्टिलाइजर्स की आपूर्ति रुकने से स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा, “एक ओर प्रधानमंत्री खाद के बोरे पर अपनी तस्वीर छपवाने में व्यस्त हैं, और दूसरी ओर किसान ‘मेड इन चाइना’ उत्पादों पर पूरी तरह निर्भर होते जा रहे हैं।”
नीतियों में खामी और घरेलू उत्पादन की अनदेखी
कांग्रेस नेता ने सरकार पर घरेलू उत्पादन को बढ़ावा न देने और पूर्व चेतावनियों के बावजूद कोई ठोस नीति न बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पहले से इस संकट की आशंका को गंभीरता से लेती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती।
निष्कर्ष
राहुल गांधी के इस बयान ने एक बार फिर कृषि नीति और आत्मनिर्भरता के सवाल को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। किसानों की समस्याएं और विदेशी निर्भरता का मुद्दा एक ऐसी सच्चाई है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को चाहिए कि वह समय रहते घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दे और किसानों को आयातित संसाधनों की अस्थिरता से बचाने के लिए ठोस रणनीति बनाए।