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🛡️ साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध भारत का बड़ा कदम: आरबीआई और दूरसंचार विभाग की संयुक्त पहल 🇮🇳



Anoop singh

डिजिटल इंडिया की तेज़ी से बढ़ती गति के साथ-साथ साइबर धोखाधड़ी की घटनाएं भी बढ़ी हैं। ऐसे समय में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और दूरसंचार विभाग (DoT) की साझेदारी ने एक नया इतिहास रच दिया है। 30 जून 2025 को आरबीआई ने देश के सभी वाणिज्यिक, लघु वित्त, भुगतान और सहकारी बैंकों को निर्देशित किया कि वे वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (Financial Fraud Risk Indicator – FRI) को अपने सिस्टम में एकीकृत करें। यह कदम भारत को साइबर धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।


क्या है वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (FRI)?
FRI एक एपीआई-आधारित डिजिटल तंत्र है, जिसे मई 2025 में दूरसंचार विभाग की डिजिटल इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) द्वारा विकसित किया गया। इसका उद्देश्य मोबाइल नंबरों को उनकी धोखाधड़ी के जोखिम स्तर — मध्यम, उच्च या बहुत उच्च — के आधार पर वर्गीकृत करना है।

यह वर्गीकरण निम्न स्रोतों से प्राप्त खुफिया जानकारी पर आधारित होता है:


FRI कैसे करेगा साइबर धोखाधड़ी पर अंकुश?


कौन-कौन से संस्थान पहले से जुड़ चुके हैं?
फोनपे, पेटीएम, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक जैसे अग्रणी संस्थान पहले ही इस तकनीक का लाभ उठा रहे हैं। इससे सिस्टम की प्रभावशीलता और सफलता का प्रमाण मिलता है।


UPI उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा की नई परत
चूंकि UPI आज देश की सबसे लोकप्रिय भुगतान प्रणाली बन चुकी है, यह पहल लाखों नागरिकों को साइबर अपराध से बचाने में अहम भूमिका निभाएगी। अब ग्राहक बिना डरे और अधिक विश्वास के साथ डिजिटल लेनदेन कर सकेंगे।


सरकार की डिजिटल दृष्टि को मिलेगी मजबूती
यह कदम सिर्फ एक तकनीकी उन्नयन नहीं, बल्कि डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत डिजिटल ट्रस्ट और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का एक ठोस प्रयास है। इससे भारत का डिजिटल वित्तीय ढांचा अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनेगा।


निष्कर्ष
FRI एक तकनीकी नवाचार ही नहीं, बल्कि भारत के डिजिटल भविष्य की सुरक्षा की कुंजी है। बैंकों, दूरसंचार विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच इस प्रकार का डेटा-साझाकरण सहयोग साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त करता है। जैसे-जैसे और अधिक संस्थाएं इसे अपनाएंगी, यह प्रणाली एक राष्ट्रीय मानक के रूप में स्थापित होगी और भारत को एक साइबर-आधारित वित्तीय धोखाधड़ी मुक्त देश बनने की ओर अग्रसर करेगी।



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