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क्वाड बैठक 2025: दक्षिण चीन सागर को लेकर भारत की स्पष्टता और शांति पर बल


Anoop singh

वॉशिंगटन डीसी, 3 जुलाई 2025 – वॉशिंगटन में आयोजित क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने एक बार फिर दक्षिण चीन सागर को लेकर अपनी चिंता और शांति की प्रतिबद्धता को ज़ोरदार तरीके से व्यक्त किया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है, और यहां स्थिरता बनाए रखना सभी क्वाड सदस्य देशों की साझी प्राथमिकता है।

जयशंकर ने बैठक में कहा, “दक्षिण चीन सागर में हालिया घटनाक्रम चिंता का विषय हैं। हमारा उद्देश्य इस क्षेत्र में शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को बनाए रखना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए क्षेत्रीय हितों की रक्षा की जा सके।”

संयुक्त बयान में कड़ा संदेश

बैठक के समापन पर जारी संयुक्त बयान में अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने बल प्रयोग या दबाव डालकर यथास्थिति को बदलने की किसी भी एकतरफा कोशिश का विरोध करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। चारों देशों ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की गतिविधियाँ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा उत्पन्न करती हैं।

बयान में कहा गया, “हम पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में ऐसी किसी भी कार्रवाई के विरुद्ध हैं जो बलपूर्वक या दबाव के माध्यम से यथास्थिति बदलने का प्रयास करे। हम इस क्षेत्र में नौवहन और हवाई उड़ान की स्वतंत्रता को लेकर प्रतिबद्ध हैं।”

गंभीर चिंताओं की सूची में कई मुद्दे

संयुक्त वक्तव्य में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष चिंता जताई गई:

अपतटीय संसाधनों के विकास में जबरदस्ती से किया गया हस्तक्षेप

नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की स्वतंत्रता में बार-बार रुकावट

सैन्य जहाजों और तटरक्षक बलों द्वारा खतरनाक युद्धाभ्यास

जलमार्गों में जानबूझकर टकराव या मार्ग अवरुद्ध करने की घटनाएं

क्वाड ने इन घटनाओं को अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चुनौती बताया।

भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग की पुनः पुष्टि

क्वाड नेताओं ने कहा कि वे भारत-प्रशांत क्षेत्र में एक नियम-आधारित व्यवस्था, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, विशेषकर यूएनक्लॉस (UNCLOS), का पालन अनिवार्य है।

निष्कर्ष

क्वाड बैठक ने एक बार फिर दिखा दिया है कि चारों लोकतांत्रिक देश दक्षिण चीन सागर की स्थिरता, स्वतंत्र आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन को लेकर एकमत हैं। भारत की ओर से स्पष्ट संदेश गया है कि वह आक्रामकता के बजाय संवाद और समाधान के पक्ष में है — एक ऐसा दृष्टिकोण जो वैश्विक शांति के लिए आवश्यक है।


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