
नई दिल्ली, 3 जुलाई 2025
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए चीन के प्रति सरकार की नीति को असफल करार दिया है। उन्होंने चीन से बढ़ते व्यापारिक तनाव और रणनीतिक खतरों को लेकर केंद्र की चुप्पी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खरगे का आरोप है कि सरकार ना केवल चीन की बढ़ती आर्थिक आक्रामकता को अनदेखा कर रही है, बल्कि भारतीय उद्योगों को आत्मनिर्भर बनाने के वादे भी अधूरे साबित हुए हैं।
🔍 तीन प्रमुख बिंदुओं पर खरगे की आपत्ति:
- भारतीय निर्माण उद्योग से चीनी तकनीकी कर्मियों की वापसी
खरगे ने दावा किया कि चीन अब अपने तकनीकी विशेषज्ञों को भारत से वापस बुला रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि वह भारत में निवेश घटा रहा है। - रेयर अर्थ मिनरल्स और उर्वरकों के निर्यात पर चीन की रोक
चीन ने हाल ही में उन खनिजों के निर्यात पर सीमाएं लगाई हैं जो भारत के इलेक्ट्रिक वाहनों, रक्षा उद्योग और करेंसी प्रिंटिंग के लिए बेहद ज़रूरी हैं। - सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता
विपक्षी नेता ने पूछा कि जब भारत अब भी चीन से भारी मात्रा में आयात करता है, तब सरकार क्यों चुप है? क्या यह आत्मनिर्भरता की असफलता नहीं है?
🧭 “मेक इन इंडिया” पर सवाल
खरगे ने यह भी कहा कि अगर ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ वास्तव में सफल होते, तो आज भारतीय बाजारों में चीनी कंपनियों का बोलबाला नहीं होता।
उनके शब्दों में:
“डोकलाम और गलवान की घटनाओं के बाद सरकार ने देशवासियों से वादा किया था कि अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर जवाब मिलेगा। लेकिन आज वही सरकार चीनी कंपनियों के लिए लाल कालीन बिछा रही है।”
🗣️ राजनीतिक प्रभाव
खरगे के इन बयानों से साफ है कि 2025 के राजनीतिक परिदृश्य में चीन से संबंध अब केवल विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति का भी बड़ा सवाल बन चुके हैं। विपक्ष इसे मोदी सरकार की नीतिगत कमजोरी के रूप में जनता के सामने रख रहा है।
🔎 निष्कर्ष:
भारत जैसे देश के लिए जहां रणनीतिक स्वायत्तता और आर्थिक आत्मनिर्भरता एक दीर्घकालिक लक्ष्य है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह चीन जैसे प्रतिस्पर्धी पड़ोसी के प्रति अपनी नीति को पारदर्शी और प्रभावशाली बनाए। विपक्ष के सवालों को दरकिनार करने के बजाय ठोस जवाब देना लोकतंत्र की भावना को मजबूत करेगा।