
आजमगढ़, उत्तर प्रदेश, 3 जुलाई 2025 – समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को आजमगढ़ में पार्टी के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब भी बिहार में चुनाव आते हैं, कुछ राजनीतिक दल जनता का ध्यान भटकाने के लिए आरक्षण, संविधान, समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों पर अनावश्यक बहस छेड़ देते हैं।
अपने संबोधन में यादव ने कहा, “जब भी बिहार में चुनाव होते हैं, कुछ दल आरक्षण और संविधान के खिलाफ बोलना शुरू कर देते हैं। वे सीधे तौर पर आरक्षण का विरोध करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें वोट खोने का डर होता है, इसलिए वे समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता को निशाना बनाते हैं।”
उन्होंने भाजपा पर उसके मूल सिद्धांतों को भूल जाने का आरोप लगाया। यादव ने कहा कि भाजपा ने जब अपने गठन के बाद पहला अधिवेशन किया था, तब उसने समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष मार्ग अपनाने का संकल्प लिया था। लेकिन आज वह उस मार्ग से भटक चुकी है।
जातिगत जनगणना का मुद्दा भी बना केंद्रबिंदु
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में जातिगत जनगणना को लेकर भी जोर दिया और कहा कि जनता अब जागरूक हो गई है और जान चुकी है कि जातिगत आंकड़े उन्हें उनके हक दिलाने में मदद कर सकते हैं।
“लोग अब जान गए हैं कि जातिगत जनगणना उनके अधिकारों की लड़ाई में सहायक हो सकती है। इसलिए कुछ ताकतें जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही हैं, ताकि असल मुद्दों पर चर्चा ही न हो,” यादव ने कहा।
सामाजिक न्याय की राह पर समाजवादी पार्टी
अखिलेश यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, डॉ. राम मनोहर लोहिया और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के दिखाए सामाजिक न्याय के रास्ते पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है।
“हमने संकल्प लिया है कि समाजवादी पार्टी समाजवाद और सामाजिक न्याय के उसी मार्ग पर चलेगी, जिसे हमारे महान नेताओं ने दिखाया था,” उन्होंने कहा।
📌 निष्कर्ष:
समाजवादी पार्टी द्वारा आजमगढ़ में नए कार्यालय का उद्घाटन न सिर्फ संगठनात्मक विस्तार का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, जातिगत गणना और धर्मनिरपेक्षता जैसे मूलभूत मुद्दों पर पार्टी की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। अखिलेश यादव के इस भाषण ने आगामी चुनावों के मद्देनज़र सियासी माहौल को एक नई दिशा दे दी है।