
नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025:
निर्वाचन आयोग ने आगामी चुनावों को पारदर्शी और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। यह बैठक बुधवार को निर्वाचन सदन, नई दिल्ली में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने की। उनके साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया पर चर्चा करना और राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों एवं सुझावों पर विचार करना था। आयोग ने यह जानकारी दी कि बिहार में यह प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है।
भाग लेने वाले प्रमुख राजनीतिक दल:
इस बैठक में भाग लेने वाले राजनीतिक दलों में शामिल थे:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
राष्ट्रीय जनता दल
समाजवादी पार्टी
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट)
झारखंड मुक्ति मोर्चा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट)
पारदर्शिता और भागीदारी पर जोर:
निर्वाचन आयोग ने बताया कि यह विशेष पुनरीक्षण अभियान एक योजनाबद्ध, संरचित और चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है, ताकि सभी पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जा सके। इस कार्य में बिहार में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,54,977 बूथ स्तर एजेंट्स (Booth Level Agents – BLAs) की सक्रिय भागीदारी हो रही है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सभी दलों से आग्रह किया कि वे और अधिक बीएलए नियुक्त करें, ताकि मतदाता नामांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सहभागिता आधारित बन सके।
पहला चरण: 25 जून से 3 जुलाई 2025
पहले चरण में, बिहार के लगभग 7.90 करोड़ मतदाताओं के लिए नामांकन फॉर्म (Enumeration Forms – EFs) की छपाई और वितरण किया गया। यह फॉर्म पहले से उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आंशिक रूप से भरे हुए हैं, जिनका स्रोत 23 जून 2025 तक के सरकारी डेटा हैं।
इस कार्य में 77,895 बूथ स्तर अधिकारी (Booth Level Officers – BLOs) लगे हुए हैं और अतिरिक्त 20,603 BLOs की नियुक्ति की जा रही है। BLOs इन फॉर्मों को मतदाताओं के घर-घर जाकर वितरित कर रहे हैं। साथ ही, ईसीआई पोर्टल से फॉर्म डाउनलोड भी किए जा सकते हैं और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए भी प्रमाणित फॉर्म जमा कर सकते हैं।
आगामी चरण:
दूसरे चरण में, इन फॉर्मों को भरकर जमा किया जाएगा, ताकि सभी योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में सही रूप से शामिल किया जा सके।
निष्कर्ष:
बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को सफल बनाने हेतु निर्वाचन आयोग की यह पहल सराहनीय है। राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी और व्यापक जनसंपर्क के माध्यम से यह प्रक्रिया अधिक प्रभावशाली और पारदर्शी बन रही है। इससे आगामी चुनावों में लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती सुनिश्चित होगी।