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🔍 दिल्ली पुलिस ने 10 घंटे में सुलझाया नकली लूट का मामला, दो गिरफ्तार


Anoop singh

नई दिल्ली, 4 जुलाई 2025:
दिल्ली पुलिस की पश्चिमी जिला टीम ने एक चौंकाने वाले नकली लूट के मामले को महज़ 10 घंटे में सुलझाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि शिकायतकर्ता खुद इस अपराध का मास्टरमाइंड निकला।

यह मामला 3 जुलाई 2025 को तब सामने आया जब मोती नगर थाने में एक कॉल के ज़रिए ₹13 लाख की लूट की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। शिकायतकर्ता सुभाष चंद (उम्र 22 वर्ष) ने दावा किया कि बैंक से ₹13 लाख निकालने के बाद उसे छह अज्ञात लोगों ने फ्लाईओवर पर लूट लिया। उसने यह भी कहा कि लुटेरे तीन बाइक पर आए थे और चाकू से हमला करके पैसा लेकर भाग गए।

लेकिन जब पुलिस ने जांच शुरू की और इलाके की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला, तो कोई भी संदिग्ध बाइक पीछा करती नहीं दिखाई दी। पुलिस को सुभाष के चोटों पर भी शक हुआ क्योंकि वे बहुत ही सतही थीं और चाकू से हमले के अनुरूप नहीं थीं। गहन पूछताछ में आखिरकार सुभाष चंद ने खुद ही सच्चाई स्वीकार ली।

पूछताछ के दौरान सुभाष ने बताया कि उसने अपने दोस्त विजयपाल (उम्र 26 वर्ष) के साथ मिलकर इस फर्जी लूट की योजना बनाई थी। उनका मकसद था कि सुभाष बैंक से ₹13 लाख निकालेगा और उसे राजौरी गार्डन मेट्रो स्टेशन पर विजयपाल को सौंप देगा, जो बाद में उसे लेकर फरार हो जाएगा।

सुभाष चंद दिल्ली की एक ट्रेडिंग कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत है और पिछले दो वर्षों से वहां नौकरी कर रहा था। उसने पुलिस को बताया कि उसने जुए और सट्टेबाज़ी में लगभग ₹30 लाख गवां दिए थे और अब उसे बचे हुए पैसों से नुकसान की भरपाई करनी थी। इसलिए उसने यह नकली लूट की साजिश रची।

बैंक से पैसा निकालने के बाद, सुभाष ने पूरा ₹13 लाख विजयपाल को सौंप दिया, जो तुरंत एक रैपिडो बाइक से धौला कुआं भाग गया और वहां से अपने गांव जाने के लिए बस पकड़ ली। पुलिस ने तुरंत हरियाणा के महेन्द्रगढ़ जिले के गांव बायल में दबिश दी और विजयपाल से पूरा पैसा बरामद कर लिया।

👉 अन्य कार्रवाई:
इसी दौरान दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने एक और कार्रवाई में गैंगस्टर मंजीत महल के भतीजे दीपक की हत्या में शामिल दो आरोपियों – विजय और सोमवीर – को भी मुठभेड़ के बाद शाहबाद डेयरी क्षेत्र से गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी।


📝 निष्कर्ष:
इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया कि पुलिस की सक्रियता और तकनीकी जांच की मदद से अपराध कितनी जल्दी उजागर हो सकता है, चाहे वह कितना भी योजनाबद्ध क्यों न हो। साथ ही यह घटना समाज में बढ़ती आर्थिक और मानसिक दबावों की भयावह सच्चाई को भी उजागर करती है।


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