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🪔 अल्लूरी सीताराम राजू के विचारों को जीवंत करती आदिवासी नीतियाँ: राजनाथ सिंह का संबोधन


Anoop singh

हैदराबाद, 4 जुलाई 2025 — स्वतंत्रता संग्राम के महानायक अल्लूरी सीताराम राजू की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत सरकार की आदिवासी कल्याण नीतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई योजनाओं को ऐतिहासिक संघर्षों का आधुनिक विस्तार बताया, और कहा कि सरकार आदिवासी समाज को सशक्त करने के लिए उसी भावना से कार्य कर रही है, जिसके लिए अल्लूरी ने अपना जीवन बलिदान कर दिया था।

राजनाथ सिंह ने कहा, “ब्रिटिश राज में आदिवासियों की ज़मीनें छीनी गईं, पारंपरिक खेती पर रोक लगाई गई और उनकी संस्कृति को दबाने का प्रयास किया गया। लेकिन आज की सरकार आदिवासियों को उनका सम्मान, अधिकार और अवसर लौटाने का कार्य कर रही है।”

🎯 आदिवासी क्षेत्रों में बहुआयामी विकास

उन्होंने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और पर्यटन के क्षेत्रों में सरकार ने विशेष योजनाएं चलाई हैं। नए स्कूल, अस्पताल, सड़कें और डिजिटल कनेक्टिविटी से जनजातीय समुदायों की जीवनशैली में बड़ा परिवर्तन आया है। पारंपरिक आजीविका को प्रोत्साहन और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं।

🔥 अल्लूरी राजू: आदिवासी आत्मसम्मान की मशाल

अल्लूरी सीताराम राजू, जो आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाटों में जन्मे थे, ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ राम्पा विद्रोह (1922-24) का नेतृत्व किया। उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए गुरिल्ला युद्ध का सहारा लिया और मात्र 27 वर्ष की आयु में 7 मई 1924 को शहीद हो गए। उन्हें स्थानीय लोग “मन्यम वीरुडु” यानी “जंगलों का वीर” कहकर सम्मानित करते हैं।

🚫 नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार

रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की सख्त नीति और समावेशी विकास मॉडल के कारण नक्सलवाद अब केवल गिने-चुने जिलों तक सिमट गया है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि 2026 तक भारत नक्सलवाद मुक्त हो। अब बुलेट की जगह बैलेट, बंदूक की जगह विकास ने ले ली है।”

🛤️ एक समावेशी भारत की ओर कदम

राजनाथ सिंह ने अंत में कहा कि भारत का लोकतंत्र तब तक संपूर्ण नहीं हो सकता जब तक उसके सबसे पिछड़े और वंचित समुदायों को मुख्यधारा में नहीं लाया जाए। अल्लूरी सीताराम राजू की प्रेरणा से सरकार जनजातीय समाज को सशक्त, शिक्षित और सुरक्षित बनाने की दिशा में पूरी निष्ठा से प्रयासरत है।


निष्कर्ष:
यह लेख न केवल आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की स्मृति को श्रद्धांजलि देता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आधुनिक भारत कैसे उनके सपनों को साकार करने की ओर अग्रसर है।

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