HIT AND HOT NEWS

भाजपा राज में गंदगी का साम्राज्य: अखिलेश यादव

Anoop singh

देश में स्वच्छता को लेकर चलाए जा रहे अभियानों और करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद जब नदियों और सार्वजनिक स्थलों की ऐसी हालत सामने आती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने एक वीडियो ट्वीट करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के राज में गंदगी का साम्राज्य स्थापित हो चुका है। इस वीडियो में एक नदी के किनारे भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा और गंदगी देखी जा सकती है, जो पर्यावरण और प्रशासनिक लापरवाही की गवाही दे रही है।

गंदगी: एक प्रशासनिक विफलता या राजनीतिक बहाना?

गंगा, यमुना जैसी नदियों को साफ करने के लिए केंद्र सरकार ने “नमामि गंगे” और अन्य कई योजनाएं चलाई हैं, जिनका उद्देश्य केवल स्वच्छता ही नहीं, बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना भी है। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। जिस तरह से नदियाँ प्लास्टिक, कचरे और मल-मूत्र से पट चुकी हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।

राजनीति बनाम हकीकत

अखिलेश यादव का यह बयान कि “अब कहेंगे इस आरोप में विदेशी हाथ है” केवल एक व्यंग्य मात्र नहीं, बल्कि सरकार के उस रक्षात्मक रवैये की ओर इशारा है, जहाँ हर विफलता के लिए या तो पूर्ववर्ती सरकारों को दोष दिया जाता है या फिर बाहरी ताकतों की साजिश करार दी जाती है। लेकिन क्या यह सही तरीका है? जनता को जवाब चाहिए, बहाने नहीं।

जनभागीदारी की कमी

सरकार की नीतियाँ तभी सफल हो सकती हैं जब उनमें जनभागीदारी हो। लेकिन देखा जाए तो जनता और प्रशासन के बीच समन्वय की भारी कमी है। नदियों को साफ रखना केवल सरकारी काम नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी भी है। मगर जब सरकारें स्वच्छता को सिर्फ चुनावी वादों और विज्ञापनों तक सीमित रखती हैं, तब हालात ऐसे ही बनते हैं।

समाधान की दिशा

  1. सख्त नियम और उनका पालन: औद्योगिक कचरे और घरेलू गंदगी के लिए कड़े कानून बनाने और उनका ज़मीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करना होगा।
  2. स्थानीय निकायों को सशक्त करना: नगर निगमों और पंचायतों को संसाधन और स्वतंत्रता दी जानी चाहिए ताकि वे स्वच्छता के लिए स्थानीय स्तर पर ठोस कदम उठा सकें।
  3. जनजागरूकता अभियान: केवल पोस्टर और विज्ञापन से नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा, सामाजिक संगठनों और मीडिया के ज़रिए लोगों में जिम्मेदारी की भावना जगानी होगी।

निष्कर्ष

गंदगी केवल एक दृश्य समस्या नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य, आस्था, पर्यावरण और विकास से जुड़ी एक गहरी चुनौती है। जो वीडियो अखिलेश यादव ने शेयर किया, वह केवल एक स्थान की तस्वीर नहीं, बल्कि उस व्यापक विफलता का आईना है जो केवल “स्वच्छ भारत” के नारों से नहीं, बल्कि ज़मीनी काम से ही दूर हो सकती है।

अब वक्त आ गया है कि सरकारें और जनता दोनों अपनी भूमिका को समझें और राजनीति से ऊपर उठकर स्वच्छता को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाएं। वरना यह “गंदगी का साम्राज्य” न केवल नदियों को बल्कि हमारे भविष्य को भी लील जाएगा।


Exit mobile version