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विसावदर की हार के बाद भाजपा की बौखलाहट: चैतन्य वसावा की गिरफ्तारी पर आम आदमी पार्टी का तीखा हमला


Anoop singh

6 जुलाई 2025, नई दिल्ली — गुजरात के विसावदर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) की जीत के बाद प्रदेश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी विधायक चैतन्य वसावा की गिरफ्तारी को भाजपा की बौखलाहट और बदले की भावना से प्रेरित बताया है।

पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, गुजरात प्रभारी गोपाल राय, सह प्रभारी दुर्गेश पाठक और राज्य अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने एक स्वर में वसावा की गिरफ्तारी की निंदा की और इसे भाजपा की भ्रष्टाचार उजागर होने की घबराहट करार दिया।

भाजपा की “राजनीतिक प्रतिशोध” की रणनीति?

केजरीवाल ने ‘X’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “गुजरात में आप विधायक चैतन्य वसावा को गिरफ्तार करना भाजपा की हताशा का संकेत है। विसावदर उपचुनाव में हार के बाद भाजपा घबरा गई है। यदि उन्हें लगता है कि गिरफ्तारी से आप डर जाएगी, तो वे बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं। गुजरात की जनता अब भाजपा के कुशासन, गुंडागर्दी और तानाशाही से तंग आ चुकी है। अब जनता भाजपा को मुंहतोड़ जवाब देगी।”

गोपाल राय ने भी यही स्वर दोहराते हुए लिखा, “विसावदर में हार से भाजपा बुरी तरह से हिल गई है। अब वे आप नेताओं पर हमले कर रहे हैं और पुलिस का दुरुपयोग कर रहे हैं। यदि वे सोचते हैं कि इससे आम आदमी पार्टी डर जाएगी, तो वे गंभीर भूल कर रहे हैं।”

दुर्गेश पाठक का आरोप: “भ्रष्टाचार उजागर होते ही भाजपा घबरा गई”

आप के वरिष्ठ नेता और सह प्रभारी दुर्गेश पाठक ने आरोप लगाया कि जैसे ही वसावा ने भाजपा के नेताओं के भ्रष्टाचार को उजागर किया, भाजपा ने तुरंत पुलिस का सहारा लिया। उन्होंने कहा, “जब भी भाजपा डरती है, वह पुलिस को आगे कर देती है। आज चैतन्य वसावा पर हमला और फिर गिरफ्तारी इसी का प्रमाण है।”

इसुदान गढ़वी बोले: “अब भाजपा का मुखौटा उतर चुका है”

गुजरात आप अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने कहा कि भाजपा अब पूरी तरह बौखला चुकी है। उन्होंने बताया कि चैतन्य वसावा एक तहसील-स्तरीय समन्वय बैठक में हिस्सा ले रहे थे और वहां उन्होंने सरकारी कार्यों में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाया था। इसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया।

गढ़वी ने कहा, “बीजेपी की हार ने उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाला है। अब वह हमारे विधायकों पर झूठे केस डालकर बदला ले रही है। लेकिन आम आदमी पार्टी के नेता न तो तानाशाही से डरेंगे और न ही पुलिस के अत्याचारों से झुकेंगे।”

निष्कर्ष: लोकतांत्रिक संघर्ष और राजनीतिक चेतना की नई लहर

विसावदर की हार भाजपा के लिए सिर्फ एक चुनावी पराजय नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक चेतावनी भी थी। आम आदमी पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह न तो पुलिसिया दमन से डरने वाली है, और न ही राजनीतिक दबाव में झुकने वाली। चैतन्य वसावा की गिरफ्तारी से उपजा यह विवाद निश्चित रूप से गुजरात की राजनीति में नए मोड़ लाएगा और जनता के बीच सत्ता के दुरुपयोग पर गहरा प्रश्न खड़ा करेगा।


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