
भारत की बुद्धिबल परंपरा एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सम्मानित हुई है। इस बार पश्चिम बंगाल के दो छोटे मगर होनहार शतरंज खिलाड़ियों—सरबार्थो मणि और ओइशिक मोंडल—ने जॉर्जिया के बटुमी में आयोजित विश्व कप शतरंज प्रतियोगिता में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए देश का नाम रोशन किया।
🎖️ बाल प्रतिभाओं की अद्वितीय उड़ान
- सरबार्थो मणि ने अंडर-10 वर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त किया, जो भारत के लिए गौरव का विषय बना।
- ओइशिक मोंडल ने इसी वर्ग में रजत पदक जीतकर इस सफलता को और भव्य बना दिया।
इन दोनों की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल की मिट्टी केवल सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक खेलों के क्षेत्र में भी अत्यंत समृद्ध है।
🌸 मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बधाई
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर इन बालक खिलाड़ियों को बधाई देते हुए लिखा:
“आपकी यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि न केवल राज्य, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएँ!”
उनका यह संदेश राज्य के अन्य उभरते खिलाड़ियों के लिए एक सशक्त प्रेरणा बन गया है।
🌐 विश्व मंच पर भारत की नई पहचान
FIDE द्वारा आयोजित यह प्रतियोगिता शतरंज की दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में गिनी जाती है। ऐसे में भारत के दो युवा खिलाड़ियों का शीर्ष पदों पर स्थान प्राप्त करना न केवल उल्लेखनीय है, बल्कि यह देश की शतरंज प्रतिभा के उज्ज्वल भविष्य की पुष्टि भी करता है।
📖 शिक्षा और खेल का संतुलन—एक सीख
सरबार्थो और ओइशिक की यह उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि बच्चों को यदि प्रारंभ से ही उचित मार्गदर्शन और समर्थन मिले, तो वे पढ़ाई और खेल दोनों में श्रेष्ठता प्राप्त कर सकते हैं। उनकी सफलता के पीछे परिवार, कोच और विद्यालय की संयुक्त भूमिका है।
🌟 निष्कर्ष
इन दोनों नन्हें शतरंज खिलाड़ियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि लगन, मेहनत और संकल्प की कोई उम्र नहीं होती। उनके पदक केवल धातु के टुकड़े नहीं, बल्कि भारत के सपनों, संघर्षों और संभावनाओं का प्रतीक हैं।
आइए, हम सब मिलकर सरबार्थो मणि और ओइशिक मोंडल को ढेरों शुभकामनाएँ दें और नई पीढ़ी को भी ऐसे ही ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रोत्साहित करें।