
भारत के रक्षा क्षेत्र में वित्तीय दक्षता और पारदर्शिता की ओर एक ठोस प्रयास के तहत, नियंत्रकों का वार्षिक सम्मेलन 2025 का उद्घाटन 7 जुलाई को देश के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा किया जाएगा। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 7 से 9 जुलाई तक डीआरडीओ भवन, नई दिल्ली के डॉ. एस.के. कोठारी ऑडिटोरियम में संपन्न होगा।
🎯 सम्मेलन का उद्देश्य
इस महत्त्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य ध्येय रक्षा वित्तीय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और रणनीतिक रूप से प्रभावशाली बनाना है। इस बार का केंद्रीय विषय है:
“वित्तीय सलाह, भुगतान, ऑडिट और लेखांकन को रक्षा वित्त और अर्थनीति के माध्यम से पुनर्परिभाषित करना”
यह विषयवस्तु मंत्रालय द्वारा 1 अक्टूबर 2024 को प्रस्तुत की गई भविष्य दृष्टि का विस्तार है, जिसमें रक्षा वित्तीय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की बात कही गई थी।
👥 प्रमुख उपस्थिति
इस सम्मेलन में रक्षा तंत्र के शीर्ष नेतृत्व की भागीदारी इस आयोजन को नीति-निर्धारण के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण बनाती है। उपस्थित गणमान्यजन:
- जनरल अनिल चौहान, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
- तीनों सेनाओं के प्रमुख अधिकारी
- रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह
- वित्तीय सलाहकार (रक्षा सेवाएँ) श्री एस.जी. दस्तिदार
- महानियंत्रक, रक्षा लेखा विभाग, श्री मयंक शर्मा
इनकी उपस्थिति से सम्मेलन को रणनीतिक और क्रियान्वयन स्तर पर बल मिलेगा।
🧩 सम्मेलन की संरचना
इस सम्मेलन के दौरान आठ सघन व्यावसायिक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाएगी:
- रक्षा बजट के नियोजन और व्यय की प्रक्रिया
- डिजिटल भुगतान प्रणाली का विस्तार
- पारदर्शी लेखांकन व्यवस्था की स्थापना
- ऑडिट प्रक्रिया में नवाचार
- वित्तीय सलाहकारों की भूमिका को पुनः परिभाषित करना
- खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनुशासन
- आंकड़ों पर आधारित निर्णय प्रणाली
- भविष्य की वित्तीय रणनीतियाँ और नीतियाँ
🌐 संभावित प्रभाव
यह सम्मेलन केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सुधार यात्रा का एक निर्णायक पड़ाव है। इसके माध्यम से:
- नीतिगत पारदर्शिता बढ़ेगी
- जवाबदेही की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा
- संसाधनों का सुदृढ़ और विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा
- रक्षा तैयारियों में आर्थिक सशक्तता आएगी
🔍 निष्कर्ष:
नियंत्रकों का सम्मेलन 2025, केवल एक वार्षिक बैठक नहीं बल्कि भारत के रक्षा तंत्र के आर्थिक आयामों को पुनर्रचना देने की दिशा में एक दूरदर्शी और ठोस पहल है। इसकी सफलता आने वाले वर्षों में रक्षा वित्त प्रबंधन के नए मानक स्थापित कर सकती है।