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🌍 गुरुत्वाकर्षण की खोज: ब्रह्मांड के रहस्य को समझने की पहली कुंजी


🔹 प्रस्तावना

गुरुत्वाकर्षण (Gravity) वह अदृश्य शक्ति है जो ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु को एक-दूसरे की ओर खींचती है। यह वही बल है जो पृथ्वी पर चीजों को नीचे गिराता है, चंद्रमा को पृथ्वी की कक्षा में बनाए रखता है और सूरज के चारों ओर ग्रहों को घूमने पर मजबूर करता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस अद्भुत बल की खोज कैसे हुई?


🔹 गुरुत्वाकर्षण का प्रारंभिक विचार

प्राचीन भारत, यूनान और अरब के वैज्ञानिकों ने भी गुरुत्व जैसे बल की कल्पना की थी। भारतीय गणितज्ञ भास्कराचार्य द्वितीय (11वीं शताब्दी) ने अपने ग्रंथ सिद्धांत शिरोमणि में गुरुत्वाकर्षण जैसी शक्ति का उल्लेख किया था। वे लिखते हैं कि “पृथ्वी वस्तुओं को अपनी ओर खींचती है।” यह विचार न्यूटन से सैकड़ों वर्ष पूर्व का है।


🔹 न्यूटन और आधुनिक गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत

🍎 न्यूटन की प्रेरणा: सेब का गिरना

17वीं शताब्दी में इंग्लैंड के वैज्ञानिक सर आइज़ैक न्यूटन (Sir Isaac Newton) ने गुरुत्वाकर्षण को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया। एक प्रसिद्ध किंवदंती के अनुसार, न्यूटन एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे थे जब एक सेब उनके पास गिरा। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया — “आख़िर यह सेब नीचे ही क्यों गिरा?”

📜 न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम

न्यूटन ने 1687 में अपनी पुस्तक Principia Mathematica में गुरुत्वाकर्षण का सार्वत्रिक नियम (Universal Law of Gravitation) प्रस्तुत किया। उनका नियम था:

“प्रत्येक वस्तु, ब्रह्मांड की अन्य हर वस्तु को एक बल से आकर्षित करती है। यह बल, वस्तुओं के द्रव्यमान के गुणनफल के समानुपाती और उनके बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।”


🔹 आइंस्टीन का दृष्टिकोण: गुरुत्वाकर्षण और समय

20वीं शताब्दी में अल्बर्ट आइंस्टीन ने गुरुत्वाकर्षण को एक नई दृष्टि से देखा। उन्होंने 1915 में सापेक्षता का सामान्य सिद्धांत (General Theory of Relativity) दिया, जिसमें कहा गया कि:

“गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं, बल्कि समय और स्थान (Space-Time) की वक्रता है। भारी वस्तुएँ जैसे सूर्य, इस वक्रता को उत्पन्न करती हैं और ग्रह उसी वक्रता में चलते हैं।”

आइंस्टीन का सिद्धांत विशेषकर बहुत बड़े द्रव्यमानों (जैसे ब्लैक होल) और उच्च गति के संदर्भ में अधिक सटीक सिद्ध हुआ।


🔹 आज की खोजें और उपयोग


🔹 निष्कर्ष

गुरुत्वाकर्षण की खोज केवल एक वैज्ञानिक घटना नहीं थी, बल्कि यह मानव जिज्ञासा और सोच की एक ऐतिहासिक छलांग थी। न्यूटन से लेकर आइंस्टीन तक, इस शक्ति को समझने की यात्रा ने विज्ञान को एक नई दिशा दी। आज हम ब्रह्मांड को जितना समझ पा रहे हैं, उसमें गुरुत्वाकर्षण की भूमिका सबसे आधारभूत और केंद्रीय है।


🔭 “गुरुत्वाकर्षण ही वह अदृश्य डोर है, जो ब्रह्मांड के कण-कण को एकसूत्र में बांधे हुए है।”

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