
भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में सामने आया जेन स्ट्रीट ग्रुप से जुड़ा विवाद सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि भारत की नियामक संस्थाओं, सरकारी पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति की गंभीर परीक्षा बनकर उभरा है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत द्वारा उठाए गए प्रश्नों ने इस विषय को राजनीतिक गलियारों से लेकर आम नागरिकों की चर्चाओं तक पहुँचा दिया है।
📊 जेन स्ट्रीट ग्रुप पर क्या हैं आरोप?
अमेरिका की एक प्रमुख अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग फर्म, जेन स्ट्रीट ग्रुप पर यह गंभीर आरोप है कि उसने जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच भारतीय शेयर और डेरिवेटिव बाज़ार में ट्रेडिंग एल्गोरिदम का दुरुपयोग कर ₹44,000 करोड़ से अधिक का अनुचित मुनाफ़ा कमाया। यह मुनाफ़ा कथित तौर पर भारत से बाहर, खासकर अमेरिका के वित्तीय तंत्र में स्थानांतरित किया गया।
📜 सेबी की भूमिका: केवल आदेश या देर से चेतावनी?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कंपनी के विरुद्ध दिशा-निर्देश और नोटिस ज़ारी किए हैं। यह दर्शाता है कि नियामक संस्थान को अनियमित गतिविधियों की भनक थी, फिर भी इतना समय क्यों लगा? क्या चेतावनी पर्याप्त थी या यह एक “बहुत देर, बहुत कम” जैसा कदम साबित हुआ?
🗨️ राजनीतिक प्रतिक्रिया का अभाव: कांग्रेस के तीखे सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की चुप्पी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पूछा:
क्या प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस घोटाले की जानकारी थी?
यदि थी, तो कोई त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या यह सरकारी तंत्र में मिलीभगत की संभावना को जन्म नहीं देता?
उनका दावा है कि यह मुद्दा सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि भारत की वित्तीय संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
🔎 नियामक ढांचे की कमजोरी या राजनीतिक संरक्षण?
यह मामला दो अहम पहलुओं को उजागर करता है:
- नियामकीय निगरानी में चूक: यदि कोई विदेशी कंपनी भारतीय शेयर बाजार में इतनी बड़ी हेराफेरी कर सकती है, तो यह SEBI की निगरानी क्षमता पर सीधा सवाल है।
- राजनीतिक असंवेदनशीलता: सरकार द्वारा अब तक इस विषय पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया या जांच का ऐलान नहीं किया जाना, जनविश्वास को झकझोरता है।
🚨 आगे की राह: पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ज़रूरी
यदि ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह सिर्फ आर्थिक व्यवस्था के लिए नहीं, भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए भी एक बड़ा झटका हो सकता है। अब ज़रूरत है एक निष्पक्ष, समयबद्ध और कानूनी जांच की, जो हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करे।
🔚 निष्कर्ष:
जेन स्ट्रीट कांड केवल एक व्यापारिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि यह भारत की आर्थिक संप्रभुता, नियामक पारदर्शिता और राजनीतिक ईमानदारी की लिटमस टेस्ट बन गया है। सरकार को अब इस पर चुप्पी नहीं, कार्रवाई से जवाब देना होगा।