
भारत के पूर्वोत्तर में बसे खूबसूरत पहाड़ी राज्य सिक्किम को इस वर्ष मानसून की बेरुखी का तीखा सामना करना पड़ा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के गंगटोक केंद्र के अनुसार, वर्ष 2025 में सिक्किम में औसतन 35% तक वर्षा की कमी दर्ज की गई है – जो पिछले पाँच वर्षों में सबसे चिंताजनक स्थिति मानी जा रही है।
📊 जिलावार वर्षा का विश्लेषण
राज्य के अधिकांश जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है, जिससे जल संकट और खेती पर बुरा असर पड़ा है:
जिला वर्षा में कमी (%)
ग्यालशिंग 49%
गंगटोक 37%
मंगन 34%
पाक्योंग 23%
नामची 20%
सोरेंग 13% (अब भी सामान्य सीमा में)
🌾 खेती-किसानी पर मंडराता संकट
सिक्किम जैविक खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्षा की कमी से:
धान और मक्का जैसे मुख्य फसलें समय पर नहीं बोई जा सकीं।
पारंपरिक सिंचाई स्रोतों का जलस्तर गिर रहा है।
किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है और ऋणग्रस्तता का खतरा बढ़ा है।
🚱 पानी की किल्लत: अब शहर भी अछूते नहीं
सिक्किम की जलापूर्ति का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक स्रोतों – जैसे झरनों, नालों और वर्षा जल पर निर्भर है। परंतु:
कई ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की गंभीर कमी देखी जा रही है।
शहरों में जल कटौती की स्थिति बन रही है।
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर भी प्रतिकूल प्रभाव दिखने लगा है।
🌲 पर्यावरणीय संतुलन पर खतरा
हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी अत्यंत नाजुक होती है। मानसून की असफलता के दुष्परिणाम दीर्घकालिक हो सकते हैं:
वन क्षेत्र सूखने लगते हैं, जिससे जैव विविधता प्रभावित होती है।
भूस्खलन और सूखे की घटनाएँ बढ़ सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं, जिन्हें अब नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
🔧 समाधान की दिशा में कदम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य और केंद्र सरकार को कुछ ठोस पहल करनी होंगी:
वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सूखा-सहिष्णु बीज और फसल चक्र परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाए।
मौसम आधारित स्मार्ट कृषि तकनीकों को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाना होगा।
स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण हेतु जन-भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
🔍 निष्कर्ष
सिक्किम में वर्षा की कमी केवल मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की चेतावनी है। यह संकट खेती, जल संसाधन और पारिस्थितिक संतुलन – तीनों को एक साथ झकझोर रहा है। यदि हमने अभी से समाधान की दिशा में ठोस क़दम नहीं उठाए, तो भविष्य में यह संकट और भी विकराल रूप ले सकता है।