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दस वर्षों की प्रगति का जश्न: वैश्विक व्यापार सुगमता में विश्व बैंक की ऐतिहासिक

Anoop singh

विश्व बैंक के ट्रेड फैसिलिटेशन सपोर्ट प्रोग्राम (TFSP) ने वैश्विक व्यापार जगत में दस वर्षों की परिवर्तनकारी यात्रा पूरी कर ली है। 2015 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम अब तक 58 देशों में क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड की प्रक्रिया को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाकर एक नई दिशा दे चुका है। इस पहल के माध्यम से 669,000 से अधिक व्यवसायों को सशक्त किया गया है, जिससे वैश्विक व्यापार और आर्थिक विकास को नई ऊंचाइयाँ मिली हैं।

तीन आधार स्तंभों पर टिका है सफलता का यह सफर:

  1. लागत में भारी कटौती:

TFSP ने कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, लालफीताशाही को कम करते हुए और व्यापारिक अवसंरचना को आधुनिक बनाकर व्यापार की लागत में भारी कमी की है। इससे न केवल कंपनियों के मुनाफे में इज़ाफ़ा हुआ है, बल्कि उपभोक्ताओं को भी कम कीमतों का लाभ मिला है।

  1. सीमा पार प्रक्रियाओं में तेजी:

व्यापार में समय ही धन है। TFSP की पहल से बंदरगाहों और सीमाओं पर लगने वाली देरी में उल्लेखनीय कमी आई है। कस्टम क्लीयरेंस तेज हुआ है, जिससे समय-संवेदनशील और नाशवंत वस्तुओं की डिलीवरी अब पहले से कहीं अधिक कुशलता से हो रही है।

  1. ऑपरेशनल दक्षता में वृद्धि:

पारदर्शिता, डिजिटल नवाचार और बहु-एजेंसी समन्वय के माध्यम से TFSP ने व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक भरोसेमंद और पूर्वानुमान योग्य बनाया है। इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार प्रवाह की स्थिरता और गति पर पड़ा है।

छोटे व्यवसायों को मिला बड़ा लाभ

इस कार्यक्रम से लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को वैश्विक बाज़ारों तक पहुंच आसान हुई है। इससे नवाचार को बढ़ावा मिला है, नए रोजगार उत्पन्न हुए हैं और उद्यमिता की संस्कृति को मजबूती मिली है। साथ ही, सरल व्यापार प्रक्रियाएं विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई हैं, जिससे सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिला है।

निष्कर्ष

विश्व बैंक का यह कार्यक्रम केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक ऐसा सशक्त उपकरण बन गया है जो समावेशी वैश्विक विकास को गति देता है। गरीबी उन्मूलन और साझा समृद्धि के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में TFSP की यह दस वर्षीय यात्रा एक मिसाल बन चुकी है।

अब जब यह कार्यक्रम अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, तब इसकी विरासत यही संदेश देती है – सुगम व्यापार केवल आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक प्रगति का मार्ग भी है।


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