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प्रस्तावना
भारत के इतिहास में कुछ शासक ऐसे हुए हैं जिन्होंने न केवल राजनीतिक एकता स्थापित की, बल्कि सांस्कृतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी देश की नींव को मजबूत किया। ऐसे ही एक महान शासक थे चंद्रगुप्त मौर्य, जिन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की और विदेशी आक्रमणों को रोकते हुए एक शक्तिशाली भारतीय साम्राज्य खड़ा किया।
🔹 प्रारंभिक जीवन
चंद्रगुप्त मौर्य का जन्म लगभग 340 ईसा पूर्व में हुआ माना जाता है। कुछ ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार वे मौर्य वंश से थे और उनका पालन-पोषण अपेक्षाकृत सामान्य परिस्थितियों में हुआ। उनका जीवन उस समय बदल गया जब उनकी भेंट महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री चाणक्य (कौटिल्य) से हुई। चाणक्य ने चंद्रगुप्त को प्रशिक्षित किया और उन्हें एक कुशल रणनीतिकार तथा प्रशासक के रूप में तैयार किया।
🔹 सत्ता की ओर कदम
नंद वंश के अत्याचारी शासन से त्रस्त जनता को चंद्रगुप्त में आशा की किरण दिखाई दी। चाणक्य की रणनीति और चंद्रगुप्त की वीरता से प्रेरित होकर एक संगठित विद्रोह खड़ा हुआ। अंततः चंद्रगुप्त ने नंद वंश का अंत किया और लगभग 321 ईसा पूर्व में मौर्य वंश की स्थापना की।
🔹 साम्राज्य का विस्तार
चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने शासन के दौरान उत्तरी भारत के अधिकांश क्षेत्रों को एकजुट किया। उन्होंने पश्चिम में सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर को हराकर अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और पंजाब तक अपने साम्राज्य को फैला दिया। यह एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक विजय थी, क्योंकि इसके परिणामस्वरूप सेल्यूकस ने अपनी पुत्री की चंद्रगुप्त से शादी कराई और बदले में चंद्रगुप्त को कई क्षेत्र सौंपे।
🔹 प्रशासन और नीतियाँ
चंद्रगुप्त का शासन कुशल प्रशासन और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध था। उन्होंने चाणक्य द्वारा रचित ‘अर्थशास्त्र’ के सिद्धांतों को अपनाया, जिसमें कर व्यवस्था, गुप्तचरी, कृषि, वाणिज्य, न्याय व्यवस्था आदि के विस्तृत वर्णन मिलते हैं। उनका शासन केंद्रीकृत था, लेकिन प्रजा की भलाई को प्राथमिकता दी जाती थी।
🔹 धर्म और जीवन का अंतिम चरण
अपने जीवन के अंतिम चरण में चंद्रगुप्त ने जैन धर्म अपना लिया और सांसारिक मोह छोड़कर कर्नाटक के श्रवणबेलगोला चले गए। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने वहाँ दीक्षा लेकर संन्यास ग्रहण किया और अंत में सल्लेखना व्रत द्वारा शरीर त्याग किया।
🔹 विरासत
चंद्रगुप्त मौर्य न केवल एक सामरिक विजेता थे, बल्कि उन्होंने एक ऐसा राजनीतिक और सांस्कृतिक ढांचा खड़ा किया, जिस पर उनके पोते सम्राट अशोक ने एक विशाल और धर्मप्रधान साम्राज्य की नींव रखी। चंद्रगुप्त की जीवनगाथा भारत में एकता, साहस और दूरदर्शिता का प्रतीक मानी जाती है।
🔹 निष्कर्ष
चंद्रगुप्त मौर्य का जीवन एक ऐसे साधारण युवक की कहानी है जो दृढ़ निश्चय, गुरु के मार्गदर्शन और अदम्य साहस से एक शक्तिशाली साम्राज्य का निर्माता बना। उनका योगदान भारतीय इतिहास में सदैव अमिट रहेगा।