
10 जुलाई 2025 – भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं के प्रति आभार प्रकट करने का अवसर होता है।
इस अवसर पर कई प्रमुख नेताओं और सार्वजनिक व्यक्तियों ने भी लोगों को शुभकामनाएं दी हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक संदेश साझा करते हुए लिखा,
“गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। उन सभी गुरुओं का धन्यवाद, जिन्होंने हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने का मार्ग दिखाया।”
यह संदेश केवल एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका की गहन समझ को भी दर्शाता है।
गुरु का महत्व भारतीय परंपरा में
भारत में गुरु को परमात्मा के समान दर्जा दिया गया है। संस्कृत में कहा गया है:
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥”
इस श्लोक में गुरु को सृष्टि का रचयिता, पालनकर्ता और संहारक तक कहा गया है। गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि व्यास जी के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन और महाभारत जैसे ग्रंथ की रचना की।
आधुनिक युग में गुरु की परिभाषा
आज के डिजिटल युग में गुरुओं की भूमिका पारंपरिक कक्षा से निकलकर जीवन के हर क्षेत्र में फैल चुकी है। माता-पिता, शिक्षक, कोच, आध्यात्मिक गुरु, और यहाँ तक कि प्रेरणादायक विचारक—सभी अपने-अपने तरीके से हमें दिशा दिखाते हैं।
राहुल गांधी जैसे नेता जब सार्वजनिक रूप से गुरुओं को सम्मान देते हैं, तो यह भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से एक सशक्त संदेश बन जाता है कि राजनीति से ऊपर उठकर भी ज्ञान और संस्कार का महत्व है।
निष्कर्ष
गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक भावना है—कृतज्ञता की, मार्गदर्शन की और आत्मिक उन्नति की। यह दिन हमें स्मरण कराता है कि चाहे हम किसी भी अवस्था या क्षेत्र में हों, एक सच्चे गुरु के बिना जीवन की दिशा अधूरी है।
इस पावन अवसर पर हम सभी को अपने गुरुओं के प्रति आदर, आभार और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।