
पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक वैभव से भरपूर राज्य मेघालय के सिएज गांव में हाल ही में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली, जिसने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सामुदायिक भूमिका को नई पहचान दी। भारत की केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने इस गांव का दौरा कर “इकोसिस्टम सेवाओं के भुगतान कार्यक्रम” के अंतर्गत लाभान्वित ग्रामीणों से संवाद किया। यह योजना पर्यावरणीय संरक्षण और आजीविका संवर्धन को एक साथ जोड़ने वाली एक प्रभावशाली पहल बनकर उभरी है।
🧭 योजना का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य स्थानीय निवासियों को उनके संरक्षण कार्यों के बदले प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्रदान करना है।
यह वन संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा और जैव विविधता के संरक्षण जैसे कार्यों को सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका के रूप में स्थापित करता है।
ग्रामीण यदि पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करते हैं, तो उन्हें इसके बदले धनराशि दी जाती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है।
👥 स्थानीय भागीदारी से बदली तस्वीर
सिएज गांव के लोग अब केवल ग्रामीण नहीं रहे, वे अब पर्यावरण संरक्षक बन चुके हैं।
वित्त मंत्री ने लाभार्थियों से प्रत्यक्ष रूप से संवाद किया, उनके अनुभव सुने और उनके प्रयासों की सार्वजनिक रूप से सराहना की।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रमाण पत्र देकर उनके योगदान को औपचारिक मान्यता दी गई, जिससे सामूहिक गर्व की भावना विकसित हुई।
🎙️ मंत्री के विचार और प्रेरक संदेश
श्रीमती सीतारमण ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह पहल पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आर्थिक विकास के संतुलन का एक उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि “जब स्थानीय समुदाय स्वयं संरक्षण की बागडोर संभालते हैं, तब परिणाम अधिक टिकाऊ और प्रभावी होते हैं।” उनका संदेश था कि प्रकृति के साथ तालमेल में जीवन ही सतत विकास का आधार है।
🏞️ सकारात्मक प्रभाव और आगे की राह
इस कार्यक्रम से न केवल पारिस्थितिकी को लाभ हुआ है, बल्कि स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।
यह मॉडल अन्य राज्यों और क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है, जहाँ जैव विविधता की रक्षा और सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता है।
केंद्र सरकार इस मॉडल को देशभर में विस्तारित करने के उपायों पर कार्य कर रही है ताकि अधिक से अधिक समुदाय इस योजना से लाभान्वित हो सकें।
🔚 निष्कर्ष: प्रकृति और समाज के बीच एक नई साझेदारी
सिएज गांव में जो कुछ घटित हो रहा है, वह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक चेतना का जागरण है। यह उदाहरण दर्शाता है कि जब नीतिगत समर्थन, स्थानीय नेतृत्व और पारिस्थितिक समझदारी एक साथ मिलती हैं, तब सृजन और संवर्धन की एक नई कहानी लिखी जाती है।