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महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: केवड़िया में क्षेत्रीय बैठक का सफल आयोजन


भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 12 जुलाई 2025 को गुजरात के केवड़िया में एक अहम क्षेत्रीय बैठक का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को बढ़ाना तथा महिला एवं बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करना था। यह बैठक “पोषण 2.0” और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में तेजी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस बैठक में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गोवा जैसे प्रमुख राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने की और उन्होंने राज्यों के बीच सहयोग को और सशक्त करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पोषण 2.0 योजना में नया अपडेट

इस बैठक में सबसे उल्लेखनीय घोषणा पोषण 2.0 योजना से जुड़ी थी। मंत्रालय ने जानकारी दी कि 1 अगस्त 2025 से लाभार्थियों का पंजीकरण अब बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सटीक लक्षित समूहों तक पहुँचे और सेवा वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी और भरोसेमंद हो।

यह तकनीकी परिवर्तन महिला और बच्चों के लिए संचालित पोषण व स्वास्थ्य कार्यक्रमों में दक्षता लाएगा। इससे डेटा संग्रह और निगरानी प्रणाली में सुधार होगा और नकली या डुप्लिकेट लाभार्थियों की समस्या को भी रोका जा सकेगा।

राज्यों का सहयोग और भविष्य की राह

बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों ने अपने अनुभव साझा किए और योजनाओं के संचालन में आ रही समस्याओं और उनके समाधान की दिशा में सुझाव दिए। यह विचार-विमर्श न केवल नीति निर्धारण में मददगार होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन को अधिक प्रभावशाली बनाने में भी सहयोग करेगा।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की यह पहल दर्शाती है कि सरकार महिला और बाल हितों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए गंभीर है। तकनीकी एकीकरण और राज्य-स्तरीय सहयोग से जुड़े इन प्रयासों से भविष्य में समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक योजनाओं का प्रभावी लाभ पहुँचाने में मदद मिलेगी।


निष्कर्ष:
केवड़िया में हुई यह क्षेत्रीय बैठक महिला और बाल विकास के क्षेत्र में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है। पोषण 2.0 जैसी योजनाओं में बायोमेट्रिक प्रणाली का समावेश नीति-निर्माण को तकनीकी आधार देगा और सरकार की “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को और मजबूती प्रदान करेगा।


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