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🌍 अफगानिस्तान की ओर मजबूरी भरी वापसी: संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी


2025 में अफगानिस्तान एक बार फिर मानवीय संकट के गहरे दलदल में फंसता दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में एक चिंताजनक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि ईरान और पाकिस्तान से करीब 14 लाख अफगान नागरिकों को जबरन अपने देश लौटना पड़ा है। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं जो न केवल शारीरिक रूप से थके हुए हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी टूट चुके हैं।

🏚️ न घर, न सहारा – सिर्फ भय और भूख

इन लोगों की वापसी किसी खुशी या आशा का प्रतीक नहीं, बल्कि एक विवश पलायन का परिणाम है। कई परिवार ऐसे हैं जिनके पास न रहने की जगह है, न रोज़गार और न ही सुरक्षा की कोई गारंटी। भूख, डर और असुरक्षा की स्थिति में लौटते इन लोगों के लिए, यह “वापसी” एक नए संघर्ष की शुरुआत है।

🤝 संयुक्त राष्ट्र की अपील: मानवीय सहायता के लिए और संसाधन जुटाएं

संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अन्य मानवीय संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि अगर इन लाखों लोगों को तुरंत सहायता नहीं दी गई, तो यह संकट और भी भयावह रूप ले सकता है। भोजन, चिकित्सा, आवास और मनोवैज्ञानिक सहायता जैसी मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अधिक वित्तीय सहयोग की मांग की गई है।

📸 एक तस्वीर, एक सच्चाई

इस संकट की भयावहता को दर्शाने वाली तस्वीरों में साफ दिखाई देता है कि सैकड़ों परिवार सीमा पार से लौटते समय सिर्फ कपड़ों और कुछ जरूरी सामान के साथ सफर कर रहे हैं। इनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं प्रमुख रूप से शामिल हैं – सभी असुरक्षित और अनिश्चित भविष्य की ओर बढ़ते हुए।

📢 निष्कर्ष

अफगानिस्तान में पहले से मौजूद सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के बीच, इतने बड़े पैमाने पर लोगों की वापसी एक और मानवीय त्रासदी को जन्म दे सकती है। यह समय है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि व्यवहारिक सहायता के जरिए इन लोगों की गरिमा, जीवन और भविष्य की रक्षा करनी होगी।


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