
भारत ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (DRDL) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) बीबीनगर ने मिलकर एक अत्याधुनिक, स्वदेशी रूप से निर्मित कृत्रिम पैर—एडीओसी (ADOC) फुट प्रोस्थेसिस—विकसित किया है। यह नवाचार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को मजबूती प्रदान करता है।
ADOC (AIIMS Bibinagar – DRDL Optimised Carbon Foot Prosthesis) एक उच्च प्रदर्शन वाला प्रोस्थेटिक उपकरण है, जिसे भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह फुट प्रोस्थेसिस विशेष रूप से K3 स्तर के उपयोगकर्ताओं के लिए तैयार किया गया है, जो गतिशील जीवनशैली जीते हैं और अधिक सक्रिय रहते हैं। इसे बायोमैकेनिकल परीक्षणों से गुज़ारा गया है और यह 125 किलोग्राम तक भार सहने में सक्षम है।
इस इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण पक्ष इसका कम लागत में उपलब्ध होना है, जो इसे आम नागरिकों के लिए भी सुलभ बनाता है। अब भारत को विदेशी प्रोस्थेसिस तकनीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे आयात का खर्च बचेगा और देश के भीतर ही उन्नत इलाज संभव हो सकेगा।
DRDO और AIIMS बीबीनगर की यह साझेदारी सार्वजनिक और शैक्षणिक संस्थानों के बीच समन्वय और सहयोग का आदर्श उदाहरण है। यह विकास न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है, बल्कि यह भारत को वैश्विक चिकित्सा प्रौद्योगिकी मंच पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करता है।
इस तरह के नवाचार न केवल देश के तकनीकी आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं, बल्कि लाखों दिव्यांग नागरिकों के जीवन में सशक्तिकरण और सम्मानजनक जीवन की नई उम्मीदें भी जगाते हैं।