
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) ने हाल ही में वैश्विक बाल टीकाकरण पर एक रिपोर्ट जारी की है, जो दुनिया भर के अभिभावकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए एक सकारात्मक संकेत लेकर आई है। 2024 के आंकड़ों के अनुसार, विश्व स्तर पर 89% नवजात शिशुओं को DTP वैक्सीन (डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस) की कम से कम पहली खुराक प्राप्त हुई है, जबकि 85% बच्चों ने यह टीका पूरा कोर्स (तीनों खुराक) प्राप्त किया है।
DTP टीका बच्चों को तीन गंभीर बीमारियों से बचाने वाला प्रमुख सुरक्षा कवच है। इन बीमारियों से न केवल जीवन खतरे में पड़ सकता है, बल्कि यह विकलांगता और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती हैं। रिपोर्ट के ये आंकड़े दिखाते हैं कि माता-पिता और सरकारें बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सजग हैं और टीकाकरण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रही हैं।
इस सफलता के पीछे स्वास्थ्य कर्मियों की निष्ठा, सरकारी निवेश, और सामुदायिक जागरूकता जैसे कई कारक हैं। कोविड-19 महामारी के समय जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, उनके बावजूद अधिकांश देशों ने टीकाकरण सेवाओं को बहाल और सुलभ बनाए रखने में सफलता प्राप्त की।
हालांकि 85% कवरेज सराहनीय है, फिर भी एक वर्ग ऐसा है जो अभी भी पूरी तरह से टीकाकरण से वंचित है। इन बच्चों तक पहुँच बनाना और उन्हें आवश्यक टीके उपलब्ध कराना आने वाले समय में एक प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए। टीकाकरण से न केवल एक बच्चा सुरक्षित होता है, बल्कि यह पूरे समुदाय को रोगों से बचाने में मदद करता है, जिसे ‘हर्ड इम्युनिटी’ कहा जाता है।
यह रिपोर्ट साबित करती है कि अगर समन्वय, नीति और जागरूकता सही दिशा में हों, तो दुनिया भर में बच्चों के स्वास्थ्य में निरंतर सुधार संभव है।