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जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की 18वीं बैठक जारी: स्वदेशी अधिकारों पर संस्थागत भागीदारी पर गहन चर्चा

जेनेवा में स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के अंतर्गत स्वदेशी लोगों के अधिकारों पर विशेषज्ञ तंत्र (EMRIP) की 18वीं वार्षिक बैठक इन दिनों चल रही है। यह महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन दुनिया भर के स्वदेशी समुदायों के अधिकारों को सुनिश्चित करने, उनकी सुरक्षा को मजबूत करने और उनकी आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने का एक प्रभावशाली प्रयास है।

इस बैठक के तीसरे सत्र में चर्चा का केंद्र रहा – राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मानवाधिकार संस्थाओं की भूमिका। इसमें यह विचार विमर्श किया गया कि ये संस्थान किस प्रकार संयुक्त राष्ट्र स्वदेशी अधिकार घोषणा के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में मदद कर सकते हैं। यह विषय इसलिए भी अहम है क्योंकि जब तक स्थानीय स्तर पर मज़बूत संस्थागत ढांचे सक्रिय नहीं होंगे, तब तक वैश्विक घोषणाओं का प्रभाव आम स्वदेशी नागरिकों तक नहीं पहुँच पाएगा।

EMRIP, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का एक सलाहकार निकाय है, जो सदस्य देशों, स्वदेशी प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों को नीति सुझाव, विश्लेषण और अनुशंसाएं प्रदान करता है। यह तंत्र भूमि अधिकारों, सांस्कृतिक संरक्षण, आत्मनिर्णय और सतत विकास जैसे विषयों पर केंद्रित संवाद की सुविधा प्रदान करता है।

बैठक में भाग लेने वाले प्रतिनिधि अनुभव साझा कर, मूलभूत समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए, नीतिगत सुधारों की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। इस सत्र का उद्देश्य स्वदेशी अधिकारों को राष्ट्रीय कानूनों और प्रशासनिक प्रणालियों में बेहतर ढंग से समाहित करना है, ताकि उन्हें व्यावहारिक रूप से सुरक्षित और सम्मानित किया जा सके।

यह बैठक स्वदेशी समुदायों के लिए न केवल एक वैश्विक मंच है, बल्कि उनके अधिकारों की वास्तविक मान्यता की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम भी है। यह संदेश देती है कि स्वदेशी लोगों के अधिकार अब केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें ज़मीनी हकीकत में तब्दील करने की दिशा में दुनिया भर के देश और संस्थान मिलकर प्रयासरत हैं।

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