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एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गर्मी: ऊर्जा पर बोझ और जीवन रक्षा हेतु स्मार्ट कूलिंग की आवश्यकता

एशियाई विकास बैंक (ADB) की एक ताज़ा रिपोर्ट ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी की गहराती समस्या को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। लगातार बढ़ता तापमान अब केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य, ऊर्जा ढांचे और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

भीषण लू और रिकॉर्ड स्तर की गर्म हवाओं के कारण करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी से बचने के लिए एयर कंडीशनर, कूलर और अन्य उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे ऊर्जा प्रणालियों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। इससे बिजली कटौती, सिस्टम फेलियर और अनियोजित ब्लैकआउट की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, जो विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए घातक सिद्ध हो सकती हैं।

यह संकट केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर खेती, मजदूरी और रोज़मर्रा की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। ADB ने स्पष्ट किया है कि अब समय आ गया है कि सरकारें और समाज मिलकर स्मार्ट कूलिंग उपायों को अपनाएं।

इन समाधानों में शामिल हो सकते हैं:

ऊर्जा-कुशल कूलिंग तकनीकों का विकास और प्रचार

हरियाली को शहरी योजनाओं में प्रमुखता देना

थर्मल रिफ्लेक्टिव निर्माण सामग्री और स्मार्ट डिज़ाइन अपनाना

सार्वजनिक स्थानों पर ‘कूलिंग सेंटर’ की स्थापना

ये सभी उपाय गर्मी से जीवन की रक्षा करने के साथ-साथ ऊर्जा की बचत और जलवायु अनुकूलन की दिशा में भी सहायक होंगे।

ADB का यह विश्लेषण साफ दर्शाता है कि यह संकट अस्थायी नहीं, बल्कि लंबी अवधि की चुनौती है। इस क्षेत्र के देशों को अब रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाते हुए ऊर्जा सुधारों और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। जलवायु परिवर्तन की सच्चाई को स्वीकारते हुए, हमें ऐसी नीतियाँ बनानी होंगी जो स्थायित्व, जागरूकता और तकनीकी नवाचार पर आधारित हों।

अब समय है सजग और संगठित होकर कार्य करने का, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ एक सुरक्षित और सहनशील जलवायु में जीवन जी सकें।

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