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🦩 थूथुकुडी के तट पर लौटे गुलाबी मेहमान: फ्लेमिंगो पक्षियों का स्वागत


तारीख: 16 जुलाई, 2025 | स्थान: थूथुकुडी, तमिलनाडु

तमिलनाडु के थूथुकुडी ज़िले का तटीय क्षेत्र एक बार फिर गुलाबी पंखों वाले मेहमानों – फ्लेमिंगो पक्षियों – की चहचहाहट से गुलजार हो उठा है। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में ग्रेटर फ्लेमिंगो अफ्रीका, दक्षिण एशिया, मध्य-पूर्व और दक्षिणी यूरोप से पलायन कर यहां पहुँचे हैं। इस वर्ष, मानसून की अच्छी वर्षा के कारण थूथुकुडी स्थित ‘व्हाइट लोटस तालाब’ में जल का स्तर भरपूर है, जिससे मछलियों और जल कीट-पतंगों की भरमार हो गई है।

यही समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र न सिर्फ फ्लेमिंगो, बल्कि पेंटेड स्टॉर्क और अन्य जलपक्षियों को भी आकर्षित करता है। यह इलाका अपने खारे जल के तालाबों और नमक के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श प्रजनन और भोजन क्षेत्र प्रदान करते हैं।

📍 क्यों पसंद है थूथुकुडी फ्लेमिंगो को?
फ्लेमिंगो पक्षी अपने गुलाबी रंग के पंखों और पतले, घुमावदार गलों के लिए जाने जाते हैं। वे मुख्य रूप से भोजन, अनुकूल जलवायु और शांत वातावरण की तलाश में पलायन करते हैं। थूथुकुडी के नमक के मैदानों में अक्टूबर से मार्च तक भोजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है — जैसे केकड़े, झींगे, कीड़े और जलकंद। यह क्षेत्र न सिर्फ भोजन बल्कि शांतिपूर्ण प्राकृतिक वातावरण और अनुकूल तापमान के कारण भी इन पक्षियों के लिए स्वर्ग समान है।

🌦️ जलवायु और पारिस्थितिकी की भूमिका
इस वर्ष हुई अच्छी बारिश के चलते तालाबों में जल भराव अधिक है, जिससे छोटी मछलियों और कीटों की संख्या बढ़ी है। इससे व्हाइट लोटस तालाब एक आदर्श चारागाह बन गया है। इसके अलावा, क्षेत्र की स्थिर तटीय जलवायु और मानवीय हस्तक्षेप से दूर शांत वातावरण इन प्रवासी पक्षियों के लिए प्रजनन का आदर्श स्थान बनाता है।

🔁 प्रवास की विशेषताएं
फ्लेमिंगो प्रवासी पक्षी हैं जिनका प्रवास मौसम, भोजन की उपलब्धता और पर्यावरणीय परिवर्तन पर निर्भर करता है। कुछ प्रजातियाँ हर साल एक ही मौसम में प्रवास करती हैं, जबकि अन्य जलवायु में स्थानीय बदलावों के अनुसार स्थान बदलती हैं। थूथुकुडी एक ऐसा ही स्थान है जहाँ हालिया जलवायु परिवर्तनों के चलते पक्षियों की आमद और बढ़ी है।

🌅 प्राकृतिक सौंदर्य में निखार
थूथुकुडी की आकाश-रेखा अब इन लंबी टांगों वाले गुलाबी पक्षियों की उपस्थिति से और भी मनोहारी हो गई है। उनका लहराता हुआ गुलाबी झुंड, तालाबों में धीरे-धीरे विचरण करता हुआ, प्रकृति प्रेमियों और पक्षी वैज्ञानिकों के लिए अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत करता है।


निष्कर्ष:
थूथुकुडी न सिर्फ प्रवासी पक्षियों का स्वागत करता है, बल्कि यह उनके संरक्षण और प्राकृतिक जैव विविधता के संतुलन का भी प्रतीक बन गया है। ऐसे क्षेत्रों को संरक्षित रखना और मानवीय दखल को कम करना आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इन सुंदर पंखों की झलक पा सकें।


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