
लाहौर [पाकिस्तान], 16 जुलाई 2025:
पाकिस्तान रेलवे ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 11 पैसेंजर ट्रेनों के वाणिज्यिक प्रबंधन को निजी क्षेत्र को सौंपने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित करना है। यह जानकारी ARY न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार दी गई है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कदम रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने, यात्रियों को सुविधाजनक सफर का अनुभव देने और सरकारी खर्च को कम करने के लिए उठाया गया है।
किन ट्रेनों का होगा निजीकरण?
जिन 11 ट्रेनों का वाणिज्यिक प्रबंधन निजी हाथों में दिया जाएगा, उनमें शामिल हैं:
हज़ारा एक्सप्रेस
बाहा उद्दीन ज़कारिया एक्सप्रेस
मिल्लत एक्सप्रेस
सुबक खारम एक्सप्रेस
रावल एक्सप्रेस
बदर एक्सप्रेस
गोरी एक्सप्रेस
रावी एक्सप्रेस
थल एक्सप्रेस
फैज़ अहमद फैज़ एक्सप्रेस
मोहेनजो दड़ो एक्सप्रेस
सूत्रों के अनुसार, इन ट्रेनों की देखरेख और सेवा प्रबंधन अब निजी कंपनियों द्वारा किया जाएगा, हालांकि इनका स्वामित्व पाकिस्तान रेलवे के पास ही रहेगा।
निविदा प्रक्रिया शुरू
रेलवे अधिकारियों ने निजी कंपनियों से बोली आमंत्रित की है, जिसकी अंतिम तिथि 12 अगस्त रखी गई है। उसी दिन सभी प्राप्त बोलीपत्र खोले जाएंगे। इच्छुक कंपनियों से समय पर अपने प्रस्ताव भेजने का आग्रह किया गया है।
पहले भी हो चुका है ऐसा फैसला
गौरतलब है कि इस वर्ष फरवरी में भी पाकिस्तान रेलवे ने 7 ट्रेनों के वाणिज्यिक संचालन को निजी कंपनियों को सौंपा था। उन ट्रेनों में कराची एक्सप्रेस, फ़ारिद एक्सप्रेस, सुक्कुर एक्सप्रेस, रावलपिंडी एक्सप्रेस और मोहेनजो दड़ो एक्सप्रेस शामिल थीं।
रेलवे विभाग ने यह स्पष्ट किया है कि यह पूर्ण निजीकरण नहीं है, बल्कि केवल संचालन का जिम्मा निजी कंपनियों को दिया जा रहा है। ट्रेनें अभी भी पाकिस्तान रेलवे के अधीन ही रहेंगी।
किराया वृद्धि और आर्थिक दबाव
इस महीने की शुरुआत में ही पाकिस्तान रेलवे ने सभी पैसेंजर, एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों के किराए में वृद्धि की थी, जो पिछले 15 दिनों में दूसरी बार हुआ है। इसका कारण पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से डीज़ल की कीमतों में आई तेजी को बताया गया है।
निष्कर्ष:
पाकिस्तान रेलवे का यह निर्णय रेलवे सेवाओं में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से जहां यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, वहीं इससे रेलवे के राजस्व में भी सकारात्मक वृद्धि देखी जा सकती है। अब देखना होगा कि यह मॉडल पाकिस्तान रेलवे की दशा और दिशा को किस तरह प्रभावित करता है।