
दिनांक 15 जुलाई 2025 को उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहाँ एक गंभीर सड़क दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई और कई घायल हो गए। यह घटना न केवल स्थानीय समुदाय के लिए बल्कि समूचे देश के लिए शोक और चिंता का विषय बन गई है।
इस दुखद घड़ी में भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गहरी संवेदना व्यक्त की और पीड़ितों तथा उनके परिजनों के प्रति अपनी पूरी सहानुभूति प्रकट की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से जारी एक बयान में उन्होंने इस दुर्घटना को अत्यंत दुःखद बताते हुए, मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए राहत राशि की घोषणा की।
🔹 प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री मोदी ने यह ऐलान किया कि इस भीषण दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के निकट परिजन को ₹2 लाख की अनुग्रह राशि दी जाएगी। इसके साथ ही, हादसे में घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति को ₹50,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से दी जाएगी, जिसका उद्देश्य आपदा या आकस्मिक घटनाओं में पीड़ितों की सहायता करना है।
🔹 PMO का सार्वजनिक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से पोस्ट में कहा गया:
“उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में सड़क दुर्घटना में जानमाल की हानि से दुखी हूँ। इस दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वालों के प्रति संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ। प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। प्रत्येक घायल को 50,000 रुपये दिए जाएँगे।”
🔹 राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय नेतृत्व का उदाहरण
प्रधानमंत्री का यह संवेदनशील और त्वरित कदम एक बार फिर यह दर्शाता है कि भारत सरकार संकट की घड़ी में अपने नागरिकों के साथ खड़ी रहती है। आर्थिक सहायता भले ही दुःख को पूरी तरह दूर न कर पाए, लेकिन यह परिजनों के लिए एक राहत का स्रोत बनती है, और यह दिखाती है कि सरकार मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देती है।
🔹 सरकार से अपेक्षाएँ और आगे की दिशा
इस दुखद हादसे से यह भी स्पष्ट होता है कि पर्वतीय राज्यों में सड़क सुरक्षा के लिए और अधिक ठोस उपायों की आवश्यकता है। दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार को यातायात नियमन, सड़क मरम्मत, और ड्राइवर प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष:
पिथौरागढ़ की यह दुर्घटना हमें न केवल जीवन की अनिश्चितता का बोध कराती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि संवेदनशील और सक्रिय नेतृत्व किस तरह लोगों के दुःख में सहभागी बन सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह मानवीय पहल एक प्रेरणास्पद उदाहरण है कि शासन केवल प्रशासन नहीं, बल्कि करुणा और उत्तरदायित्व का भी दायित्व है।